लखनऊ। प्रो. सोनिया नित्यानंद को एक बार फिर केजीएमयू के कुलपति पद की कमान सौंप दी गई है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें तीन वर्ष के लिए दोबारा केजीएमयू का कुलपति नियुक्त किया है। केजीएमयू के इतिहास में पहली बार किसी डॉक्टर को दोबारा इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अगस्त 2023 से 2026 तक के पहले कार्यकाल में डॉ. सोनिया नित्यानंद के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने नैक ए प्लस-प्लस मान्यता हासिल करने और विभिन्न विभागों में रोबोटिक सर्जरी का विस्तार करने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज कीं। केजीएमयू में अब तक 36 प्रिंसिपल रहे हैं। विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद 12 कुलपति नियुक्त हो चुके हैं। केजीएमयू में देशभर से मरीज आते हैं। ऐसे में कुलपति के तौर पर डॉ. सोनिया नित्यानंद के सामने चिकित्सा सेवाओं को और बेहतर बनाने के साथ मरीजों की सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान देने की चुनौती होगी।
पिता-पुत्री को मिला था पद्मश्री
डॉ. सोनिया ने केजीएमयू से 1986 में एमबीबीएस और 1989 में एमडी (मेडिसिन) की डिग्री पूरी की। डॉ. सोनिया और उनके पिता डॉ. नित्य आनंद दोनों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। डॉ. सोनिया नित्यानंद भारत की प्रतिष्ठित इम्यूनोलॉजिस्ट, हीमैटोलॉजिस्ट और चिकित्सा शिक्षिका हैं।
पहले कार्यकाल की उपलब्धियां
- केजीएमयू एनआईआरएफ रैंकिंग में देश के शीर्ष पांच चिकित्सा संस्थानों में शामिल हुआ।
- सीएसआर के सहयोग से संचालित कार्यक्रम के तहत करीब 190 सब्सिडी वाली रोबोटिक सर्जरी की गईं।
- लिवर, किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाओं को भी रफ्तार मिली।
- ट्रॉमा सेंटर को अपग्रेड किया गया
- 500 बेड के नए ट्रॉमा-2 का निर्माण कार्य शुरू कराया।