लखनऊ। 60 साल की उम्र में ही जब लोग खुद को बुजुर्ग मानकर घर में बैठ जाते हैं, उस समय रंगमंच पर अपने अभिनय के शिखर पर एक जिंदादिल इंसान दर्शकों का चहेता बनकर तालियों का लुत्फ उठा रहा होता है। धीरे-धीरे समय बीतता जाता है लेकिन वह शख्स उसके बाद भी न तो थकता है और न ही रुकता है। अपने पहले प्रेम रंगमंच के साथ 82 साल की उम्र में भी रोमांस का सिलसिला जारी रखे हुए उस शख्सियत का नाम है डॉ. अनिल रस्तोगी। 99 नाटकों के देश-विदेश में हजारों शो करने के बाद उम्र के इस पड़ाव में अब वे अपने जीवन का सौवां नाटक लेकर दर्शकों के बीच आ रहे हैं।
बियांड द कर्टेन नामक इस हिंदी रूपांतरित नाटक का मंचन 22 दिसंबर को संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में होगा। इस नाटक की इन दिनों रिहर्सल चल रही है। डॉ. अनिल रस्तोगी ने बताया कि अपने सौवें नाटक के लिए मैं बेहद उत्साहित हूं और पूरी कोशिश कर रहा हूं कि दर्शकों का मुझ पर पिछले 64 साल से कायम विश्वास बना रहे।
उन्होंने बहुत सी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं लेकिन रंगमंच से मोहब्बत नहीं छूट पाई। चेखव के नाटक स्वान सांग से प्रभावित इस नाटक का पुनर्लेखन किया है यश योगी ने और निर्देशन कर रही हैं मुस्कान गोस्वामी। इस नाटक में अनिल रस्तोगी के साथ शहर के रंगकर्मी अंबरीष बॉबी भी भूमिका निभाएंगे। मुस्कान गोस्वामी के साथ देवांश प्रसाद और प्रताप यादव सह निर्देशक की भूमिका में हैं।
नाटक में दिखेगी डॉ. अनिल रस्तोगी की रंगयात्रा
नाटक की निर्देशक मुस्कान गोस्वामी ने बताया कि चेखव की कहानी में एक किरदार है वासली का। जो बड़ा कलाकार होता है लेकिन व्यवस्था से निराश हो जाता है और अपनी पुरानी जिंदगी को याद करता है। मुस्कान ने बताया कि जब इस संबंध में हमने डॉ. अनिल रस्तोगी से बात की तो उन्होंने बताया कि वे अपनी जिंदगी से बिल्कुल भी निराश नहीं हैं और रंगमंच उनके लिए आज भी दिल की धड़कन की तरह है। ऐसे में हमने मूल कहानी में परिवर्तन किया और उसे डॉ. अनिल रस्तोगी के अनुभव के अनुसार सकारात्मक मोड़ दिया। नाटक को फिर से लिखते समय हमने डॉ. अनिल रस्तोगी के अभिनय के सफर को खुशहाल दिखाया है। नाटक में डॉ. रस्तोगी की पूरी जिंदगी की रंगयात्रा की झलक दिखाई जाएगी। ड्रामा के साथ डांस और रोमांस भी है जिसे डॉ. अनिल पूरी शिद्दत से निभा रहे हैं। मंच पर उनका यह रूप दर्शकों को बहुत पसंद आएगा।