फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व दिव्यांगता दिवस: बच्चा गुमसुम रहे या दिखे ज्यादा चंचल... डॉक्टर को जरूर दिखाएं, हो सकता मानसिक दिव्यांग

Tue, 03 Dec 2024 10:49 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

विश्व दिव्यांगता दिवस पर  डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने कहा कि बच्चा गुमसुम रहे या ज्यादा चंचल दिखे तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। वह मानसिक दिव्यांग हो सकता है। 
विज्ञापन
 प्रबंध निदेशक दिव्यांशु कुमार, डॉ. आदर्श त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी स्थित केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने बच्चों को लेकर काफी अहम जानकारी साझा की। कहा कि कोई भी बच्चा गुमसुम रहे, अचानक गुस्सा करने लगे या घर में सामान तोड़ने-फोड़ने लगे तो उसे चिकित्सक को दिखाएं। लंबे समय तक यह प्रवृत्ति बनी रहने पर वह मानसिक दिव्यांग भी हो सकता है।

विज्ञापन


तीन दिसंबर को विश्व दिव्यांगता दिवस है। उन्होंने बताया कि कोविड के बाद मानसिक दिव्यांगता के केस लगातार बढ़ रहे हैं। लोग उपचार शुरू कराते हैं लेकिन बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे में फिर से समस्या हो जाती हैं। डिप्रेशन, एंजाइटी, बाइपोलर डिसऑर्डर, ओसीडी, ईटिंग डिसऑर्डर, न्यूरो डेवलपमेंट डिसऑर्डर, डिमेंशिया, अल्जाइमर आदि में दवा के साथ ही पुनर्वास की जरूरत भी पड़ती है।

बच्चों की मानसिक जांच भी जरूरी

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण आनंद बताते हैं कि टीकाकरण की तरह ही बच्चों की मानसिक जांच भी जरूरी है। उसका बोलना, चलना और शारीरिक सक्रियता को परखा जाना चाहिए। इससे पता चलेगा कि कहीं वह मानसिक दिव्यांगता की ओर तो नहीं बढ़ रहा है। 

समय पर इलाज शुरू होने से वह ठीक हो सकता है। मनोचिकित्सक डॉ. पारुल प्रसाद कहती हैं कि बच्चों को दवा के बजाय पुनर्वास के जरिये ठीक किया जा सकता है। उनका मानना है कि बच्चों की लाइफ स्टाइल और खानपान से उनके दिमाग की सक्रियता को सही दिशा दी जा सकती है। 

दिव्यांगता में खानपान की अहम भूमिका

इस संबंध में आहार विशेषज्ञ श्रुतिका चौधरी बताती है कि मानसिक और शारीरिक दिव्यांगता में खानपान की अहम भूमिका होती है। इसलिए काउंसिलिंग के बाद बच्चों को पोषक आहार की जरूरत होती है। ऐसा करके हम बच्चों को बेहतर बना सकते हैं।

सालभर चलेगा निःशुल्क शिविर 

मानसिक दिव्यांगता के खिलाफ शुरू हुई जंग में आहूति डालते हुए लखनऊ के ‘द होप फाउंडेशन’ द्वारा संचालित ‘द होप रिहैबिलिटेशन एंड लर्निंग सेंटर’ की तरफ से पूरे साल (तीन दिसंबर 2024 से तीन दिसंबर 2025) तक कैंप का आयोजन किया जाएगा। सेंटर के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु कुमार ने बताया कि इस कैम्प के तहत कोई भी व्यक्ति या मरीज का फ्री अस्सेस्मेंट किया जाएगा।

विज्ञापन


बताया कि चार दिन की मुफ्त थेरेपी दी जाएगी। फ्री कंसल्टेशन दिया जाएगा। इस जन-जागरूकता अभियान के तहत समाज में ये सुनिश्चित किया जाएगा कि थेरेपी के माध्यम से मानसिक विकारों पार काफी हद तक जीत पाई जा सकती है। समाज को इस बात के लिए भी जागरूक किया जाएगा कि मानसिक दिव्यांगता लाइलाज नहीं है।

मरीज को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है

सही जानकारी और सही इलाज के माध्यम से इससे जूझ रहे मरीज को ठीक कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। दिव्यांशु कुमार ने बताया, हम प्रोफेशनल थेरापिस्ट की टीम के साथ इस मुहिम की शुरुआत कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य यही हैं कि नई पीढ़ी को मानसिक दिव्यांगता और मानसिक विकारों से निजात दिला सकें।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें