बिजली चोरी को लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग भी सख्त हो गया है। बिजली चोरी में पकड़े जाने पर उपभोक्ता को शमन शुल्क के साथ ही दो गुना जुर्माना भी देना होगा।
सोमवार को नियामक आयोग के अध्यक्ष एसके अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई विद्युत वितरण संहिता रिव्यू पैनल की उप समिति की बैठक में इसकी मंजूरी दे दी गई।
साथ ही यह भी तय हुआ है कि निर्धारित समयावधि में ट्रांसफार्मर न बदले जाने या सेवाओं के न मिलने पर उपभोक्ता सीधे नियामक आयोग में याचिका दायर कर सकेंगे।
बैठक में विद्युत वितरण संहिता में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। पैनल के सदस्यों का कहना था, बिजली चोरी को लेकर किसी तरह की रियायत नहीं होनी चाहिए।
अभी तक बिजली चोरी में पकड़े जाने पर उपभोक्ता से शमन शुल्क से साथ सिर्फ वह राजस्व वसूला जाता था, जिसका जांच में निर्धारण होता था।
बैठक में मध्यांचल वितरण निगम के एमडी एपी सिंह, एनपीसीएल के प्रतिनिधि राजीव गोयल, रिव्यू पैनल के संयोजक विकास चंद्र अग्रवाल, नियामक आयोग सचिव संजय श्रीवास्तव, पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक वाणिज्य संजय सिंह समेत बिजली कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
समय पर ट्रांसफार्मर न बदले जाने पर फिक्स व मिनिमम चार्ज में छूट
पैनल के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रस्ताव रखा कि अगर किसी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति करने वाला ट्रांसफार्मर व लाइन वितरण संहिता में तय की गई समयसीमा में बदला या ठीक नहीं की जाती है तो उपभोक्ता से फिक्स चार्ज और मिनिमम गारंटी चार्ज न वसूला जाए।
वर्मा ने इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश का भी उल्लेख किया। इस पर सर्वसम्मति से निर्णय किया गया कि ऐसे मामलों में केस टू केस आधार पर उपभोक्ता सीधे नियामक आयेाग में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत याचिका दायर कर फिक्स चार्ज व मिनिमम गारंटी चार्ज को खत्म करने की मांग सकते है। आयेाग के फैसले के अनुसार उपभोक्ता को फिक्स चार्ज व मिनिमम गारंटी चार्ज से छूट दी जाएगी।
समय पर सेवाएं न मिलने पर भी आयोग में दायर कर सकेंगे वाद
उपभोक्ता परिषद की ओर से दूसरा प्रस्ताव समय पर बिजली संबंधी सेवाएं न मिलने को लेकर रखा गया।
परिषद का कहना था कि वितरण संहिता के प्रावधानों के तहत समय पर बिजली की गड़बड़ी दूर न होने, कनेक्शन व मीटर बदलने में देरी, बिलिंग, केबल फॉल्ट, तार फ्यूज आदि के मामले में अगर बिजली कंपनियां मुआवजा नहीं देती हैं तो उपभोक्ता विद्युत अधिनियम की धारा 57 के तहत सीधे नियामक आयोग में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ वाद दायर कर सकेंगे। उप समिति के सदस्यों ने इस प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया।