लंबे अर्से से रेलवे को अपनी जीवन रेखा बनाने वाले दैनिक यात्रियों को अब दोगुना किराया वहन करना होगा।
रेलवे ने उनकी सेकेंड श्रेणी की एमएसटी को दोगुना करना का निर्णय लिया है। रेलवे ने उनकी सेकेंड श्रेणी की एमएसटी को दोगुना करने का निर्णय लिया है।
अब दैनिक यात्रियों को 30 सिंगल यात्रा के बराबर किराया देना होगा। जबकि अब तक वह 15 सिंगल यात्रा के बराबर किराया देते थे।
इससे उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के 20 हजार दैनिक यात्री प्रभावित होंगे। इनमें से 12 हजार दैनिक यात्री लखनऊ में एमएसटी बनवाते हैं।
12 हजार दैनिक यात्री लखनऊ से कानपुर, रायबरेली, अमेठी, हरदोई, संडीला, गोंडा, बाराबंकी और उन्नाव सहित आसपास के 150 किलोमीटर तक स्थित स्टेशनों की ओर रवाना होते हैं।
रेलवे के पास अपनी मेमू ट्रेनों में इन दैनिक यात्रियों के बैठने तक के लिए जगह नहीं है। मेमू ट्रेनों से दैनिक यात्री लटककर यात्रा करते हैं।
उस पर एमएसटी को दोगुना करने से उन पर हर माह करीब 350 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
लखनऊ से सबसे अधिक करीब आठ हजार यात्री कानपुर की एमएसटी बनवाते हैं। जबकि फैजाबाद, रायबरेली और अमेठी व बाराबंकी की एमएसटी धारकों की संख्या भी तीन हजार रुपये के करीब है।
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल को दैनिक यात्रियों से हर माह 80 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। एमएसटी दोगुनी महंगी होने पर यह आय बढ़कर 1.6 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।
एमएसटी बनने में आई कमी
ट्रेनों में दैनिक यात्रियों के उत्पात के कारण हाईकोर्ट के निर्देश का पालन शुरू होते ही एमएसटी बनना कम हो गई है।
अब एमएसटी बनाने के लिए दैनिक यात्रियों को अपनी आईडी लगानी पड़ती है। तीन प्रारूप को भरने के बाद उसका एक हिस्सा जीआरपी को जांच के लिए भेजा जाता है।
जीआरपी की जांच के बाद ही दैनिक यात्रियों को एमएसटी जारी होती है। इस प्रक्रिया में फर्जी तरीके से एमएसटी बनाने वाले भाग खड़े हुए।
यहीं कारण है कि पहले जहां मंडल में करीब 27 हजार दैनिक यात्री एमएसटी बनवाते थे, अब यह घटकर 20 हजार हो गई है। लखनऊ में ही 16 हजार एमएसटी हर माह बनती थी, जो अब करीब 12 हजार पहुंच गई है।
रेलवे कर रहा यात्रियों के साथ भेदभाव
लखनऊ-कानपुर दैनिक यात्री संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह कहते हैं कि रेलवे अपने दैनिक यात्रियों के साथ भेदभाव करता है।
मुंबई के दैनिक यात्रियों के लिए हर पांच मिनट में चमचमाती हुई तेज रफ्तार दौड़ने वाली लोकल ट्रेनें मिलती हैं।
लखनऊ के दैनिक यात्री दिल्ली से दस साल पहले आईं खटारा और कबाड़ हो चुकीं मेमू की बोगियों में लटकककर यात्रा करते हैं।
मेमू की 12 बोगियों की क्षमता है और भीड़ के समय उसमें 1100 यात्रियों को सफर करना पड़ रहा है।
कानपुर दैनिक यात्री संघ के महासचवि राजनारायण मिश्र कहते हैं कि रेलवे ने एमएसटी दोगुनी महंगी कर दी, इससे ज्यादा दुखदायी तो यह है कि कानपुर के अधिसंख्य यात्री होने के बावजूद मेमू का रखरखाव नहीं हो रहा है।
बीच रास्ते मेमू ट्रेनें इंजन में गड़बड़ी केकारण खड़ी हो जा रही हैं। इसे भी बेहतर किया जाना चाहिए।