यह गाड़ी दिल्ली जाने वालों को बेहद पसंद थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका आकर्षण कम होता गया। अब हालत यह है कि ट्रेन की ऑक्यूपेंसी भी घट रही है। ऑफ सीजन में तो ट्रेन खाली रहती है। डबलडेकर की जगह पैसेंजर शताब्दी, तेजस व गोमती एक्सप्रेस से यात्रा करना पसंद करते हैं।
इस ट्रेन से ज्यादा से ज्यादा लोग यात्रा करें, इसके लिए पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने इसे नए रूट से चलाने का प्रस्ताव बनाया है। इसे सीतापुर रूट से आनंदविहार ले जाने से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि रेलवे की कमाई भी बढ़ेगी। एक अनुमान के मुताबिक, आमदनी 30 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रस्ताव के अनुसार, डबलडेकर एक्सप्रेस लखनऊ जंक्शन से सीतापुर के बीच करीब 80 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर सिर्फ दो स्टेशनों पर ही रुकेगी। मसलन, लखनऊ जंक्शन से निकलने के बाद ट्रेन मोहिबुल्लापुर और सिधौली स्टेशनों पर रुकेगी, जबकि इसे ऐशबाग व डालीगंज में नहीं रोके जाने का प्रस्ताव बनाया गया है।
सिधौली के बाद ट्रेन सीतापुर होते हुए आनंदविहार तक जाएगी। लखनऊ जंक्शन-आनंदविहार डबलडेकर एक्सप्रेस और दिल्ली-जयपुर डबलडेकर को मिलाकर एक ट्रेन बनाने की योजना थी, जोकि लखनऊ-जयपुर डबलडेकर बन जाती, लेकिन यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी।
विद्युतीकरण का मिला फायदा
लखनऊ से सीतापुर के बीच विद्युतीकरण का काम पूरा कराया जा चुका है। अब रूट पर इलेक्ट्रिक इंजन से चलने वाली ट्रेनों को दौड़ाने की तैयारी है। अनुमति मिल जाने के बाद रूट पर डबलडेकर को दौड़ाया जाएगा, जिसका प्रस्ताव तैयार हो गया है और जल्द ही इस पर अंतिम मुहर भी लग जाएगी।