केजीएमयू के जागरूकता कार्यक्रम में मौजूद डॉक्टर, स्टाफ व कैंसर सर्वाइवर।
लखनऊ। स्तन में गांठ या असामान्य बदलाव महसूस हो तो झिझक छोड़कर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और इलाज से बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। यह जानकारी केजीएमयू के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के डॉ. नसीम अख्तर ने शनिवार को स्तन कैंसर जागरूकता माह के तहत आयोजित कार्यक्रम में दी।
डॉ. अख्तर ने बताया कि करीब 70 फीसदी मरीज कैंसर की एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं। इसकी प्रमुख वजह शुरुआती लक्षणों की अनदेखी और जांच में देरी है। विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार के मुताबिक, पांच सेंटीमीटर से छोटी गांठ होने पर 85 से 90 फीसदी तक स्तन बचाया जा सकता है। अधूरा ऑपरेशन कैंसर फैलने का खतरा बढ़ा सकता है। डॉ. संजीव मिश्र ने आशा कार्यकर्ताओं और मोबाइल के जरिये मरीजों का फॉलोअप मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि असामान्य जांच का मतलब कैंसर होना नहीं है लेकिन पुष्टि के लिए आगे की जांच जरूरी है।
समय पर इलाज से दी कैंसर को मात
स्तन में गांठ महसूस होने पर पूजा ने परिजनों को जानकारी दी। वे उन्हें केजीएमयू ले गए जहां जांच में कैंसर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने पहले कीमोथेरेपी दी और फिर ऑपरेशन कर गांठ निकाल दी। समय पर इलाज से पूजा का स्तन बचा लिया गया।
देरी से दूसरे अंगों तक फैला कैंसर
पूनम बाला ने शुरुआत में घरेलू नुस्खों पर भरोसा किया। इलाज में देरी से कैंसर स्तन से लिवर, स्प्लीन (तिल्ली) समेत दूसरे अंगों तक फैल गया। गंभीर हालत में केजीएमयू पहुंचने पर उनका इलाज कीमोथेरेपी और ऑपरेशन से किया गया। पूनम के मुताबिक, परिवार के सहयोग और हौसले ने उन्हें इस मुश्किल दौर से उबरने में मदद दी। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।