केंद्र के शुभारंभ के मौके पर अतिथि।
लखनऊ। डॉक्टरों का काम सिर्फ मरीजों की समस्या सुनकर उन्हें परामर्श देना ही नहीं है। उनकी जिम्मेदारी है कि वे मरीजों से बेहतर तरीके से संवाद और बर्ताव करें। डॉक्टर और चिकित्सीय विद्यार्थियों को इसकी नीतियों के बारे में प्रशिक्षण देने के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय में बुधवार को यूनेस्को के बायोएथिक्स केंद्र का उद्धाटन किया गया।
लोहिया संस्थान में बायोएथिक्स केंद्र की नोडल प्रोफेसर नवबीर पसरिचा ने बताया कि यूनेस्को के बायोएथिक्स केंद्र का मकसद मरीजों को बेहतर व्यवहार का एहसास कराना है। इसके लिए डॉक्टर और विद्यार्थी दोनों को प्रशिक्षित किया जाएगा। बात और बर्ताव के साथ ही डॉक्टर और विद्यार्थियों को चिकित्सा संबंधी अन्य एथिक्स की जानकारी भी दी जाएगी। इस मौके पर लोहिया संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव मिश्रा, प्रो. वेद प्रकाश मिश्रा, प्रो. मैरी मैथ्यू, प्रो. प्रद्युम्न सिंह और प्रो. रसेल डिसूजा मौजूद रहे।