चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने मेडिकल कॉलेजों के उन शिक्षकों को चेतावनी दी है जो अपने काम के बजाय प्राइवेट प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान देते हैं। उन्होंने कहा कि एक बार सभी को सुधरने का मौका दूंगा, यदि इसके बाद भी न सुधरे तो ऐसे डॉक्टरों को जेल भेजा जाएगा।
राज्यमंत्री मंगलवार को विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने बताया कि विभाग में शिक्षकों के काफी पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर जल्द भर्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मेडिकल कॉलेजों की कमियों को तत्काल दूर करने के लिए भी कहा गया है।
मंत्री ने कहा कि वे खुद मेडिकल कॉलेजों का औचक निरीक्षण करेंगे। उस दौरान यदि कमी मिली तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में आने वाले मरीजों के साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए, जबकि आए दिन जूनियर डॉक्टरों व तीमारदारों के बीच संघर्ष के मामले सामने आते रहते हैं।
इसे देखते हुए प्रिंसिपलों से कहा गया है कि वे अपने यहां जूनियर डॉक्टरों की बैठक बुलाकर उन्हें इस बारे में समझाएं। तीमारदारों के साथ उनका व्यवहार ठीक हो, इसके लिए कड़े दिशा-निर्देश दिए जाएं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है।