राजधानी लखनऊ स्थित बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों ने तीन साल की बच्ची को दुर्लभ बीमारी से निजात दिलाई है। बच्ची के मल द्वार के बजाय पेशाब मार्ग से मल लगातार बहता था। तीन चरणों में बच्ची की सर्जरी करके उसे जन्मजात बीमारी से निजात दिलाई है। डॉक्टरों का कहना है ये बीमारी पांच हजार में किसी एक को होती है।
गोंडा के तुलसीपुर निवासी सद्दाम की बेटी आलीमा बानो के जन्म से मलद्वार नहीं था। पेशाब के रास्ते से मल बाहर आता था। बलरामपुर अस्पताल की पीडियाट्रिक सर्जरी की ओपीडी में डॉ. अखिलेश कुमार को दिखाया। जांच में एनोरेक्टल मालफॉर्मेशन बीमारी की पुष्टि हुई।
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ऑपरेशन कर नियो-एनस का किया निर्माण
डॉ. अखिलेश ने बताया कि आठ नवंबर 2023 को पहला ऑपरेशन किया था। इसमें सिग्मॉइड कोलन की कोलोस्टॉमी की गई। उसके बाद 21 अप्रैल 2024 को ऑपरेशन कर नियो-एनस का निर्माण किया गया। 23 अप्रैल 2025 को अंतिम चरण के ऑपरेशन में कोलोस्टॉमी क्लोजर की प्रक्रिया की गई। ऑपरेशन के बाद बच्ची पूरी तरह से ठीक है। अस्पताल के निदेशक डॉ. दिनेश कुमार ने ऑपरेशन टीम को बधाई दी है।
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ऑपरेशन करने वाली टीम में ये लोग रहे शामिल
पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. अखिलेश कुमार, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. एमपी सिंह, डॉ. एसए मिर्जा, डॉ. जूही पाल, ओटी इंचार्ज निर्मला मिश्रा, सीमा शुक्ला, राजू व गिरीश ऑपरेशन टीम के सदस्य रहे।