प्रो. जेडी रावत ने बताया कि कमीशन में चीन, रूस व अन्यदेशों से डिग्री लेने वाले चिकित्सकों की पहले एमसीआई एक परीक्षा लेती थी। इसके बाद उन्हें भारत में इलाज करने की अनुमति दी जाती थी। अब देश के मेडिकल कॉलेजों से डिग्री लेने वालों को टेस्ट देने होगा और विदेश से एमबीबीएस की डिग्री खरीद कर लाने वालों को सीधे प्रैक्टिस करने अनुमति दी जाएगी।
मोतियाबिंद के ऑपरेशन से लेकर माइनर सर्जरी भी रही ठप
आईएमए की हड़ताल के चलते राजधानी में मोतियाबिंद के ऑपरेशन से लेकर माइनर सर्जरी तक ठप रही। एक-एक निजी नर्सिंग होम में 8 से 10 ऑपरेशन टाल दिए गए। नर्सिंग होम एसोसिएशन के महासचिव डॉ. अनूप अग्रवाल ने बताया कि लगभग 250 अस्पताल एसोशिएशन में हैं।
इनमें करीब 500 ऑपरेशन टाले गए हैं। जबकि अन्य 1200 अस्पतालों में माइनर सर्जरी को मिलाकर लगभग 2400 ऑपरेशन न होने का अनुमान है। मेयो हॉस्पिटल की निदेशक डॉ. मधुलिका सिंह, शेखर हॉस्पिटल की निदेशक रिचा सिंह आदि ने भी 8 से 10 बड़े ऑपरेशन निरस्त होने की बात स्वीकार की है।
पैथोलॉजिस्ट एंड माइक्रोबॉयोलॉजी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि लगभग 300 पैथोलॉजी पंजीकृत केंद्रों और 200 से अधिक गैर पंजीकृत डायग्नोस्टिक व पैथोलॉजी सेंटर में 25 हजार से अधिक लोगों की रोजाना जांच होती है। हड़ताल के चलते इन सभी लोगों को बिना जांच के ही वापस लौटना पड़ा।
एसोसिएशन की मांगें
- प्रत्येक प्रांत से पंजीकृत चिकित्सा स्नातकों में से एक प्रतिनिधि को नेशनल मेडिकल कमीशन में शामिल करें।
- आयुष के लिए अलग से पंजीकरण न हो।
- एलोपैथी दवाओं की प्रैक्टिस के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता एमबीबीएस ही रहे।
- एमबीबीएस के बाद किसी भी प्रकार के लाइसेंस परीक्षा न हो।
- चिकित्सा विवि शुरू करने व चलाने के लिए न्यायोचित निरीक्षण व समुचित नियंत्रण होना चाहिए।
- निजी चिकित्सा विद्यालयों में सरकार द्वारा 85 फीसदी निर्धारित शुल्क भी होना चाहिए।