लखनऊ। निगोहां में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में एडी मंडल ने बृहस्पतिवार को निजी अस्पताल पहुंचकर जांच की। इसमें अस्पताल के डॉक्टर की लापरवाही मिली। आरोप है कि उसने डिलीवरी करने में देरी की। इससे रक्तस्त्राव शुरू हो गया। हालत गंभीर होने पर हायर सेंटर रेफर किया गया। इस दौरान रास्ते में ही जच्चा-बच्चा की मौत हो गई।
दयालपुर के मजरा परमेश्वरखेड़ा निवासी मजदूर शैलेंद्र कुमार पत्नी प्रेमलता (26) को डिलीवरी के लिए 18 अगस्त की सुबह 11 बजे पारस हॉस्पिटल ले गए थे। इस दौरान कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं था। बीएमएस डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए भेज दिया। बच्चा उल्टा था और गर्दन में फंदा लगा था। ऐसे में ऑपरेशन से प्रसव होना था। अस्पताल प्रशासन ने इसकी तारीख बीतने के बाद भी ऑपरेशन नहीं किया, जिससे प्रसूता को ब्लीडिंग शुरू हो गई। इसके बाद डॉक्टरों ने महिला को हायर सेंटर रेफर किया। लखनऊ के निजी अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में जच्चा-बच्चा की मौत हो गई।
एडी मंडल डॉ. जीपी गुप्ता को अस्पताल में तमाम लापरवाही मिली। बताया कि महिला का पहला बच्चा सिजेरियन तरीके से हुआ था। दूसरा बच्चा देर होने से हाई रिस्क में चला गया था। इसके बाद भी बरती लापरवाही में जच्चा-बच्चा की जान गई है।
प्रसूता के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई थी। हालत गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर रेफर किया गया था।
-डॉ. एनके मौर्या, संचालक पारस हॉस्पिटल