चिकित्सा अधिकारियों को वार्षिक चरित्र पंजिका (एसीआर) में हेरफेर करना भारी पड़ेगा।
प्रशासनिक अधिकारी की बर्खास्तगी के बाद अब जिन चिकित्सकों की एसीआर में गड़बड़ी पकड़ी गई है उन पर गाज गिराने की तैयारी चल रही है।
इसकेअलावा स्वास्थ्य महानिदेशालय के गोपन अनुभाग के अन्य कर्मचारी भी जांच की जद में आएंगे। शासन में बैठे अधिकारी इस धोखाधड़ी में कड़ी कार्रवाई करने का मन बना रहे हैं।
चिकित्सकों की एसीआर में गड़बड़ी मामले में सैकड़ों चिकित्सकों पर भी कार्रवाई के आसार हैं।
यहीं नहीं, वर्तमान प्रशासनिक अधिकारी की बर्खास्तगी के बाद उनसे पहले के प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी भी जांच की जद में आएंगे।
जिन पत्रावलियों की जांच के बाद गोपन विभाग के प्रशासनिक अधिकारी को बर्खास्त किया गया है, उनमें से कई प्रविष्टियां उनके कार्यभार संभालने के पहले की हैं।
सूत्रों की मानें तो यह गड़बड़ी भले ही हाल के कुछ महीने में खुली हो लेकिन गड़बड़ियां वहां लंबे समय से होती रही हैं।
इसमें पूर्व प्रशासनिक अधिकारी (अब सेवानिवृत्त) का कार्यकाल भी शामिल रहा है।
जिन 21 पत्रावलियों की जांच की गई है, उनमें मिलीं गड़बड़ियां 2000 से भी पहले की हैं।
जबकि बर्खास्त किए गए प्रशासनिक अधिकारी ने गोपन का कार्यभार 2007 में संभाला था।
इस खुलासे के बावजूद एक ही प्रशासनिक अधिकारी पर कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की विश्वसनीयता पर अंगुली उठा दी है।
वहीं, इस फर्जीवाडे़ में सैकड़ों डॉक्टरों के फंसने की आशंका केचलते पूरे मामले को दबाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
तत्काल आख्या मांगता है शासन
इस फर्जीवाडे़ से शासन में बैठे अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर भी अंगुली उठ रही है।
शासन से अविलंब और तत्काल आख्या मांगने के कारण एसीआर की ब्रॉडशीट का सही से परीक्षण नहीं हो पाता।
नियमानुसार किसी भी प्रस्ताव पर महानिदेशालय में बैठे संयुक्त निदेशक और अपर निदेशक स्तर के अधिकारी को जांच करनी होती है।
आख्या जल्दी भेजने के फेर में इन अधिकारियों ने भी लापरवाही बरती। शासन में बैठे समीक्षा अधिकारी, अनुभाग अधिकारी भी इस ब्रॉडशीट का परीक्षण करते हैं।
ऐसे में इन अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी जांच की तलवार लटक रही है।