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शरीर को निरंतर सक्रिय रखकर बच सकते हैं पैरालिसिस से, डॉक्टर ने दी सलाह

Sat, 27 Jun 2020 05:24 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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वर्क फ्रॉम होम हो या अन्य कोई स्थिति, शरीर को हमेशा सक्रिय रखने की जरूरत होती है। जो लोग खुद को निष्क्रिय रखते हैं उनमें पैरालिसिस का खतरा ज्यादा हो सकता है। इसलिए हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम एक घंटे व्यायाम जरूर करना चाहिए। यह कहना है न्यूरो विशेषज्ञ डॉक्टर विनोद तिवारी का। वह शुक्रवार को अमर उजाला मेडिकल हेल्पलाइन में लोगों के सवालों का जवाब दे रहे थे। पेश है प्रमुख सवाल जिसे ज्यादातर लोगों ने पूछा।
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सवाल- मुझे हाई ब्लड प्रेशर के साथ अन्य कई समस्या है। पैरालिसिस से बचने के लिए क्या करना चाहिए? - रजत सिंह गोमती नगर, शिव प्रकाश जानकीपुरम
जवाब- पैरालिसिस से बचने के लिए शरीर को सक्रिय रखें। खून के कम बहाव और नसों के फटने से यह समस्या आती है। शरीर में त्वचा के समीप की नसें संकुचित हो जाती हैं। इसके कारण रक्तचाप बहुत बढ़ जाता है। बहुत से लोगों में यही संकुचन मस्तिष्क की ओर बढ़ जाता है। यही मस्तिष्क आघात का कारण बनता है। इसलिए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें। सुबह शाम शारीरिक श्रम जरूर करें। 

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सवाल- यदि किसी को स्ट्रोक पड़ा है तो तत्काल क्या करना चाहिए? इसके क्या है लक्षण? - पवन शुक्ला कृष्णा पल्ली, जयंत सिंह इंदिरा नगर
जवाब- इसे फास्ट, एफ एसटी के फॉर्मूले से समझा जा सकता है। एफ  का मतलब फेस यानी मुख का टेढ़ा होना, ए का मतलब बाजू में ताकत कम होना अथवा हाथ न उठा पाना। एस का मतलब स्पीच यानी बोलने की क्षमता कम होना अथवा बोलने में लड़खड़ाहट आना। टी का मतलब टाइम यानी ऊपर के तीनों लक्षण दिखते ही मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना। यह प्रक्रिया अपनाकर मरीज को स्ट्रोक की स्थिति में भी बचा सकते हैं।
 

सवाल-  पैरालिसिस या ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति में मरीज को कितनी देर में अस्पताल पहुंच जाना चाहिए? - शंभू शरण एलडीए कॉलोनी, हरिशंकर आलमबाग
जवाब-
स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही मरीज को तत्काल न्यूरोलॉजिस्ट के पास ले जाना चाहिए। यदि मरीज को छह घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसे फिर से सामान्य स्थिति में लाया जा सकता है। छह घंटे के अंदर आरटीपी इंजेक्शन लग जाए तो पूरी रिकवरी की गुंजाइश रहती है। जरूरत पड़ने पर सर्जरी तत्काल होनी चाहिए।

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आधे सर में दर्द सा बना रहता है

डॉ विनोद तिवारी - फोटो : amar ujala
सवाल- स्ट्रोक पड़ने पर मरीज को भर्ती कर आते वक्त किस तरह के अस्पताल में प्राथमिकता देनी चाहिए? - राकेश पटेल नगर, बैजनाथ गोसाईंगंज
जवाब- स्ट्रोक के मरीज को भर्ती कराते वक्त ध्यान रखना चाहिए कि संबंधित अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो सर्जन उपलब्ध है या नहीं। संबंधित अस्पताल में एमआरआईए सीटी स्कैन, ब्लड बैंक भी होना चाहिए।
 
सवाल-  लगातार सिरदर्द बना रहना क्या ट्यूमर की वजह हो सकता है। ऐसे में क्या करना चाहिए? -प्रियंका सरोजिनी नगर, सुशीला रसूलपुर
जवाब- यदि लगातार सिर दर्द बना रहता है तो न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। एमआरआई से स्थिति की जानकारी मिल जाती है। अब ट्यूमर की सर्जरी भी सरल हो गई है। अत्याधुनिक उपकरण आने से न्यूरॉन्स के बीच मौजूद ट्यूमर को आसानी से निकाला जा सकता है। कई बार इसकी साइज छोटा करने के लिए कुछ वक्त तक सिकाई भी कराई जाती है।

सवाल- काफी दिनों से मेरे आधे सर में दर्द सा बना रहता है और भारीपन रहता है। क्या यह दर्द माइग्रेन का है क्या करें?- शकुंतला गोमती नगर, दिव्या सिंह रहमान खेड़ा
जवाब- अगर यह सिरदर्द बीच-बीच में होता है और उल्टी महसूस होती है। शोर और तेज रोशनी खराब लगती है तो यह दर्द माइग्रेन का हो सकता है। इसके लिए आपको कुछ चीजों का परहेज करना चाहिए जैसे चॉकलेट, पनीर, काफी आदि के साथ ही जिस बात से दर्द उठने का अंदेशा हो, उससे बचें।
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