लखनऊ। केजीएमयू से लखीमपुर की महिला को निजी अस्पताल ले जाने के आरोपी जूनियर डॉक्टर रमेश कुमार को प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर गठित जांच समिति ने देर शाम बैठक कर यह फैसला किया। इससे पहले विभागाध्यक्ष की ओर से डॉक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।
बांड पूरा होने के बाद रखा गया था विभाग में
रेजिडेंट डॉ. रमेश कुमार का बॉन्ड करीब तीन महीने पहले ही खत्म हो चुका था। इसके बावजूद सीनियर डॉक्टर की शह पर उसे दोबारा तैनाती देकर तीन महीने के लिए रख दिया गया था। जांच में दोषी साबित होने पर उसकी बर्खास्तगी की जा सकती है। मामले में लापरवाही के आरोप में भी केस दर्ज किया जा सकता है। इसके लिए सीएमओ कार्यालय की ओर से पड़ताल शुरू कर दी गई है। ऐसा जुगाड़... बिना पैरवी मिल गया वेंटिलेटर
मामले में जूनियर डॉक्टर के अलावा कई लोगों के शामिल होने की आशंका है। इसका कारण है कि केजीएमयू में बिना जुगाड़, सिफारिश के मरीज को वेंटिलेटर मिलना आसान नहीं होता है। इसके बावजूद निजी अस्तपाल से लाई महिला को सीधे वेंटिलेटर मिल गया।
मृतक पूनम मौर्या के परिवारीजनों ने बताया कि हालत खराब होने पर अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने ही उन्हें केजीएमयू में भर्ती कराया था। इसके लिए न तो उन्हें ट्रॉमा सेंटर और न किसी दूसरे विभाग जाना पड़ा। शताब्दी फेज-2 भवन में मौजूद वेंटिलेटर यूनिट में पूनम को भर्ती करा दिया गया। 26 अक्तूबर से नौ नवंबर के बीच दवाओं पर करीब एक लाख रुपये का खर्च आया। हालांकि, वेंटिलेटर चार्ज के नाम पर कोई पैसा नहीं जमा कराया गया। संभव है कि अनहोनी की आशंका और मामला खुलने के डर से निजी अस्पताल प्रशासन ने शुल्क चुकाया गया हो। हालांकि, यह जांच के बाद ही साबित हो सकेगा। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संस्थान से सात दिन में मांगी रिपोर्ट
जांच के लिए पहुंची टीम, संचालक निजी अस्पताल बंद करके गायब
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। केजीएमयू की ओपीडी से मरीज को निजी अस्पताल ले जाने के मामले में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने जांच का आदेश दिया है। केजीएमयू प्रशासन से सात दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
उधर, स्वास्थ्य विभाग की टीम निजी अस्पताल पहुंची तो पता चला कि घटना के बाद से ही संचालक अस्पताल बंद करके गायब है।
लखीमपुर के सुरेंद्र पाल सिंह की पत्नी पूनम मौर्या केजीएमयू में ईएनटी विभाग की ओपीडी में आई थीं। यहां से जूनियर डॉक्टर उन्हें सर्जरी के लिए खदरा स्थित केडी हॉस्पिटल ले गया था। सर्जरी से पहले बेहोशी देते समय उनकी हालत खराब हो गई। इसके बाद 26 अक्तूबर को पूनम को केजीएमयू में भर्ती करा दिया गया।
नौ नवंबर को उनकी मौत होने के बाद मामला जानकारी में आया। उपमुख्यमंत्री ने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर केजीएमयू प्रशासन से जवाब मांगा है। मामले की जांच के लिए केजीएमयू प्रशासन ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की अध्यक्षता में समिति बनाई है। इस समिति में चिकित्सा अधीक्षक, कुलसचिव, प्रॉक्टर और नाक, कान और गला विभाग के अध्यक्ष हैं।
अस्पताल संचालक को भेजा नोटिस
स्वास्थ्य विभाग की टीम सोमवार को केडी हॉस्पिटल पहुंची तो मौके पर कुछ नहीं मिला। अफसरों का कहना है कि अस्पताल संचालक के फोन नंबर पर नोटिस भेजकर इलाज से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। रवि श्रीवास्तव दो वर्षों से यह अस्पताल चला रहा था। टीम को अस्पताल का बोर्ड तक नहीं मिला। आसपास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि संचालक बिल्डिंग खाली करके हफ्ते भर पहले ही भाग गया है। पूनम के अस्पताल में भर्ती होने के साक्ष्य भी मिटा दिए गए हैं। कैमरे और मरीज की फाइल गायब है। रवि किराये की बिल्डिंग से अस्पताल का सारा सामान ले गया है। टीम ने सीएमओ ऑफिस को इसकी जानकारी दे दी है। नर्सिंग होम के नोडल अफसर डॉ. एपी सिंह के मुताबिक, अस्पताल संचालक के बयान व दस्तावेज न देने पर मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति होगी।