फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

11 साल बाद फोरम ने दिया फैसला

Wed, 02 Apr 2014 08:35 AM IST
अतुल भारद्वाज/अमल उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉक्टरों की लापरवाही के एक कारण एक नवजात को जन्म के कुछ दिनों बाद ही अपना दाहिना हाथ गंवाना पड़ा गया।
विज्ञापन


11 साल पुराने इस मामले में जिला उपभोक्ता फोरम में आरोपी डॉक्टर और अस्पताल को 1.29 लाख रुपये जुर्माने का आदेश दिया है।

मामले की सुनवाई के बाद उपभोक्ता फोरम प्रथम के अध्यक्ष विजय वर्मा ने विपक्षी को एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति के साथ 25 हजार रुपये मेडिकल खर्च लौटाने करने और चार हजार रुपये विधिक व्यय के अदा करने का आदेश दिया।

सरोजनी नगर इलाके के शांतिनगर के साबित अली ने जिला उपभोक्ता फोरम प्रथम में शिकायत की थी कि उनके नवजात बेटे को गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने से उसके हाथ में गैंगरीन हो गया।
विज्ञापन


इससे बाद में उसका हाथ काटना पड़ा। शिकायत में साबित ने लाल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर कृष्णानगर के मैनेजर डॉ. एलके श्रीवास्तव, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निरूपमा मिश्रा और प्रशासक एमएल श्रीवास्तव को विपक्षी पार्टी बनाया था।

शिकायतकर्ता ने कहा कि उसकी पत्नी फरजाना बानो ने छह जनवरी 2003 को लड़के का जन्म दिया। उस समय बच्चा पूरी तरह ठीक था।

जन्म के बाद गलत इंजेक्शन लगाने की वजह से उसका दाहिना हाथ नीला पड़ना शुरू हो गया। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल के लोगों ने जबरन शिकायतकर्ता से डिस्चार्ज पेपर पर साइन करा लिए और डॉक्टरों ने कहा कि दवाई खिलाने पर बच्चा अपने आप ठीक हो जाएगा।

28 जनवरी को बच्चे की तबियत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में फिर से भर्ती कराया गया। इस बार डॉक्टरों ने उसका हाथ काटने की जरूरत बताई। हाथ कटने से बच्चा हमेशा के लिए विकलांग हो गया।

अस्पताल प्रबंधन ने फोरम को सौंपे गए अपने हलफनामे में कहा कि बच्चे को हेमाटोमा बीमारी थी। इसलिए बेहतर ट्रीटमेंट के लिए उसे केजीएमयू रेफर किया था।

बच्चे के घर वाले जब उसे दोबारा अस्पताल ले आए तो उसे गैंगरीन था। बच्चे की हालत को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टर ने हाथ काटकर एम्युटेशन किया। मरीज के परिजन बेवजह तथ्यों को तोड़मरोड़कर पेश कर रहे हैं।

नवजात को गलत इंजेक्शन लगाए जाने जैसा रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। फोरम ने कहा कि विवाद बच्चे के जन्म पर नहीं, बल्कि उसे गलत इंजेक्शन दिए जाने और उसका हाथ काटने पर है।

अस्पताल प्रशासन बच्चे को हेमाटोमा बीमारी से पैदा हुआ मानता है, लेकिन इससे गैंगरीन होने का कोई तथ्य मौजूद नहीं है। छह जनवरी को डॉक्टर के रिकॉर्ड में केजीएमसी की एनआईसीयू में रेफर किया जाना तो लिखा गया।
विज्ञापन


लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर के डिस्चार्ज स्लिप पर साइन तक नहीं हैं। वहीं शिकायतकर्ता ने केजीएमसी रेफर किए जाने की बात से ही मना किया। सच यह है कि बच्चे को अस्पताल में लगातार ट्रीटमेंट दिया जा रहा था।

गैंगरीन गलत इंजेक्शन की वजह से ही फैला। अस्पताल की लापरवाही की वजह से बच्चे का हाथ तक काटना पड़ा। इसमें अस्पताल प्रशासन की खुद की गलती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें