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वीडियो वायरल कर मांगी मदद, फोन पर शुरू हुआ इलाज, कोरोना की जंग में ‘अमर उजाला’ की पहल

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अलीगंज निवासी अथर्वी शुक्ला का एक वीडियो मंगलवार को वायरल हुआ। एक दिन पहले मां अर्चना शुक्ला को खो चुकी अथर्वी जिम्मेदारों से कोई सहयोग न मिलने की शिकायत कर रही थी, तो दूसरी तरफ वह मदद की गुहार भी लगा रही थी। इस कठिन घड़ी में ‘अमर उजाला’ ने इस बच्ची से संपर्क किया और उसकी इलाज शुरू करवाने की मांग पूरी करवाई। इस काम में केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन के डॉ. वेद प्रकाश सहयोगी बने।
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वीडियो वायरल करने वाली महिला का नाम प्राची पाठक है, जो बदायूं में रहती हैं। अथर्वी की वे चचेरी बहन हैं। फोन पर उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया की अथर्वी की मां अर्चना शुक्ला का देहांत कोरोना से सोमवार को हुआ। इलाज तो मिला नहीं, दाह संस्कार की गुहार लगाई वो भी पूरी नहीं हुई, आठ घंटे तक शव पड़ा रहा। घर में मृतक की बेटी-बेटा और पति तीनों ही संक्रमित हैं। निजी एंबुलेंस से शव बैकुंठधाम पहुंचवाया, वहां भी रात दो बजे से सुबह दस बजे तक का इंतजार करना पड़ा। दोनों बच्चे किसी डॉक्टर से इलाज चाहते हैं।
...और शुरू हो गया इलाज
केजीएमयू के प्लमोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन के विभागाध्याक्ष डॉ. वेद प्रकाश से अमर उजाला ने इस दिक्कत को लेकर संपर्क किया। डॉ. वेद खुद इस वक्त आइसोलेशन में हैं। कॉन्फ्रेंस कॉल पर उन्होंने अथर्वी, उसके भाई और पापा की केस स्टडी समझी और उनकी रिपोर्ट देखी, इसके बाद जरूरी दवाइयां लिखवाकर उनका इलाज शुरू करवाया। अब बुधवार को उनका फॉलोअप लिया जाएगा।
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होम आइसोलेशन में भी सही इलाज से जीत सकते हैं जंग
डॉ. वेद प्रकाश कहते हैं कि ऑक्सीजन को लेकर मरीज-घरवाले परेशान हो रहे हैं। सही समय पर सही इलाज से सब कुछ मेंटेन किया जा सकता है। यदि थोड़ा सा धैर्य रखा जाए और सही दवाइयां समय पर शुरू कर दी जाएं तो ज्यादातर मरीजों को अस्पताल आने से रोका जा सकता है। पहला सप्ताह वायरस के रेप्लीकेशन का होता है। दूसरे सप्ताह में निमोनिया डवलप होता है। यदि पहले सप्ताह के अंत में सिटी स्कैन करा लें तो उससे निमोनिया की शुरुआत हुई है या नहीं इसका पता लगाया जा सकता है। शुरुआत में ही निमोनिया के लिए दवा दे दें तो ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखा जा सकेगा। इससे न आर्टिफिशियल ऑक्सीजन की जरूरत होगी न ही अस्पताल जाना पड़ेगा।
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