लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड एक बाबू के इलाज में निजी प्रैक्टिनर्स और अस्पताल की मिलीभगत से बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
रिटायर्ड कर्मचारी शुगर से पीड़ित हैं। इलाज के नाम पर एक प्राइवेट डॉक्टर उन्हें रोजाना 396 रुपये की दवा की खुराक दे रहा था। कर्मचारी ने 10 माह का बिल बनाकर एक लाख 96 हजार रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावा किया। शुगर जैसी आम बीमारी में इतनी महंगी दवा देखकर अफसरों ने जांच शुरू की। फर्जीवाड़ा पकड़ में आने पर नेशनल मेडिकल काउंसिल को डॉक्टर की प्रैक्टिस बैन करने की संस्तुति भेजी गई है।
इसी तरह दूसरा मामला एक निजी अस्पताल का सामने आया है। रिटायर्ड कर्मचारी पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे थे, लेकिन अस्पताल ने एक लाख दो हजार रुपये का बिल थमा दिया। दोनों मामलों की जांच एडी ऑफिस से कराई गई है और रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी गई। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में कार्रवाई की जा रही है और पूरी रिपोर्ट जल्द ही आला अफसरों को भेजी जाएगी।