सम्मेलन में बोलते कुलपति प्रो. अतुल राय।
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग की ओर से रसायन और जीव विज्ञानियों का तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सोमवार को मालवीय सभागार में शुरू हो गया। भारतीय रसायनज्ञ और जीवविज्ञानी सोसाइटी (आईएससीबी) के सहयोग से हो रहे इस सम्मेलन का मुख्य विषय रासायनिक, जैविक और औषधीय विज्ञान में वर्तमान प्रवृत्तियां व स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभाव है।
कुलपति प्रो. आलोक राय ने कहा कि रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान का आधुनिक जीवन में अपना-अलग महत्व है। महामारी के दौरान 2020 में लखनऊ विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग ने स्वदेशी सैनिटाइजर विकसित किया था। उन्होंने कहा शिक्षकों को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ज्ञान को छात्रों, उद्योग और अंततः समाज तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि विश्वविद्यालयों को भी आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए।
आईएससीबी के महासचिव डॉ. पीएमएस चौहान ने कहा कि आज तकनीकी दौर है। समय के साथ चलना जरूरी है। प्रो. अनमिक शाह ने वैश्विक चुनौतियों को सुलझाने पर जोर दिया। यूएसए में अध्यक्ष और मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. मुकुंद एस चोरघड़े ने रासायनिक उद्यम को बढ़ावा देने की बात कही। कुमाऊं विश्ववविद्यालय के कुलपति डॉ. दीवान सिंह रावत ने कहा कि सिंथेटिक चयनात्मकता और आर्थिक व्यवहार्यता प्राप्त करने में चुनौतियां हैं। यह रणनीति उन संक्रामक रोगों को ठीक करने की संभावना देती है, जहां मौजूदा उपचारों में सीमाएं हैं।