इस संदर्भ में अधिनियम 1993 की धारा-3 की उपधारा (1) के खंड (दो) को प्रतिस्थापित कर नि:शक्त लोगों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। लोक सेवाओं और पदों के प्रत्येक समूह में संवर्ग सदस्य संख्या में कुल रिक्तियों की संख्या का 4 प्रतिशत दिव्यांग लोगों से भरा जाएगा।
इसमें (क) दृष्टिहीन और कम दृष्टि, (ख) बधिर और श्रवण शक्ति ह्रास, (ग) प्रमस्तिष्कीय अंगघात, उपचारित कुष्ठ, बौनापन, एसिड आक्रमण पीड़ित और मांसपेशीय दुष्पोषण सहित चलन क्रिया संबंधी नि:शक्तता से ग्रस्त लोगों के लिए एक-एक प्रतिशत तथा (घ) स्वपरायणता, बौद्धिक नि:शक्तता, विशिष्ट अधिगम नि:शक्तता और मानसिक अस्वस्थता, (ड.) खंड (क) से (घ) के अधीन आने वालों में से बहुनि:शक्तता जिसके अंतर्गत हर नि:शक्तता के लिए निर्धारित पदों में बधिर-अन्धता शामिल है, के लिए एक प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।