जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर मंगलवार को एकल नामांकन करने वाली भाजपा प्रत्याशी छात्रा आरती तिवारी को वैधानिक रूप से नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचित घोषित कर दिया। बुधवार को आरती कलेक्ट्रेट पहुंचकर जीत का प्रमाण पत्र प्राप्त करेंगी।
गोंडा : घनश्याम मिश्र का भी निर्विरोध निर्वाचन
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी धनश्याम मिश्र को निर्वाचित घोषित कर दिया गया है। जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही की ओर से निर्वाचन का आदेश जारी कर दिया गया है
अंबेडकरनगर : तीन जुलाई को फाइनल होगा जिला पंचायत अध्यक्ष
जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कब्जा पाने के लिए अब भाजपा व सपा के बीच आमने-सामने की टक्कर होगी। मंगलवार को नाम वापसी के दौरान किसी भी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया। ऐसे में आगामी तीन जुलाई को अब मतदान होगा। मतदान प्रक्रिया को सकुशल व शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए प्रशासन ने सभी जरूरी तैयारियां तेज कर दी हैं।
रायबरेली : पूर्व सांसद की बहू और शिक्षक की पत्नी आमने-सामने
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में पूर्व सांसद स्व.अशोक सिंह की बहू आरती सिंह और शिक्षक की पत्नी रंजना चौधरी के बीच इस बार सीधी टक्कर है। कांग्रेस से आरती सिंह और भाजपा से रंजना चौधरी चुनाव मैदान में हैं। भाजपा प्रत्याशी रंजना चौधरी का कोई राजनैतिक इतिहास नहीं है, लेकिन एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह उनका चुनाव में सपोर्ट कर रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी रंजना एलएलबी पास हैं। वह बीएड भी कर चुकी हैं। उनके पति पुतून कुमार निर्मल परिषदीय स्कूल में शिक्षक हैं। रंजना पिछले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ऊंचाहार से जिला पंचायत सदस्य चुनी गई थीं। इस बार रोहनियां प्रथम से डीडीसी चुनी गई हैं। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी आरती सिंह एमबीए कर चुकी है। आरती ने अवध स्कूल से इंटर पास करने के बाद बीबीए किया। इसके बाद उन्होंने एमबीए की पढ़ाई की। वह पूर्व सांसद स्व.अशोक सिंह की बहू, जबकि कांग्रेस नेता मनीष सिंह की पत्नी हैं। चुनाव में दोनों पक्षों का पलड़ा भारी दिख रहा है।
अयोध्या : भाजपा और सपा आमने-सामने
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। मंगलवार को किसी भी प्रत्याशी ने अपना नाम वापस नहीं लिया। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के कराए जा रहे निर्वाचन में भाजपा समर्थित प्रत्याशी रोली सिंह और सपा समर्थित प्रत्याशी इंदूसेन ने नामांकन दाखिल किया था। सहायक रिटर्निंग अफसर व एडीएम गोरे लाल शुक्ल ने बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मतदान तीन जुलाई को होगा। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
सीतापुर : भाजपा और सपा समेत चारों प्रत्याशी चुनावी मैदान में
जिले पंचायत अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव को लेकर नामांकन दाखिल करने वाले किसी भी प्रत्याशी ने मंगलवार को तय मियाद पूरी तक नामांकन वापस नहीं लिया, इससे अब तक लगाई जा रही तमाम तरह की अटकलों पर विराम लग गया है। भाजपा प्रत्याशी श्रद्घा सागर व सपा की अनीता राजवंशी के साथ ही प्रीति सिंह रावत और चंद्र प्रभा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। अब इनके भाग्य का फैसला 3 जुलाई को होगा। 79 जिला पंचायत सदस्य तय करेंगे कि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर वह किसे काबिज कराएंगे।
अमेठी : भाजपा-सपा में भिड़ंत, किसी ने वापस नहीं लिया पर्चा
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर नामांकन करने वाले भाजपा और सपा प्रत्याशी में किसी ने मंगलवार को अपना पर्चा वापस नहीं लिया। नाम वापसी का समय समाप्त होने के बाद यह तय हो गया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी के लिए भाजपा व सपा प्रत्याशी के बीच सीधी टक्कर होगी। तीन जुलाई को मतदान के बाद मतगणना भी होगी।
सुल्तानपुर : तीन प्रत्याशी मैदान में
जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में तीन प्रत्याशी मैदान में आ गए हैं। मंगलवार को नाम वापसी के दौरान किसी प्रत्याशी ने अपना नाम वापस नहीं लिया। नाम निर्देशन पत्र वापस नहीं लिए जाने के बाद भाजपा प्रत्याशी ऊषा सिंह, सपा प्रत्याशी केशा देवी व निर्दल अर्चना सिंह मैदान में हैं। तीनों प्रत्याशी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
विकल्प के अभाव व मजबूत पैरवी से बनी भाजपा प्रत्याशी
जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रत्याशी के चयन में भाजपा के पास निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष व वार्ड नंबर 25 की डीडीसी ऊषा सिंह के अलावा कोई विकल्प नहीं था। जिले का जिला पंचायत अध्यक्ष महिला के लिए आरक्षित है और चुनाव में दो सीट जीतने वाली भाजपा के पास ऊषा सिंह के अलावा कोई महिला विजेता नहीं थीं। माना जा रहा है कि संगठन के पास उनके नाम की संस्तुति करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसके साथ ही ऊषा सिंह पर जिले के कई विधायक, सांसद मेनका गांधी व पार्टी के पदाधिकारियों तक का सपोर्ट बताया जा रहा है। विकल्प के अभाव व मजूबत पैरवी में ऊषा सिंह भाजपा की उम्मीदवार बन गईं।
अध्यक्ष की भाभी होने का केशा देवी को मिला फायदा
सपा प्रत्याशी केशा देवी मौजूदा सपा जिलाध्यक्ष पृथ्वीपाल यादव की भाभी हैं। पृथ्वीपाल यादव एक बार जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं। परिवार की मजबूत राजनीतिक पकड़ की वजह से केशा देवी सपा प्रत्याशी बनने में कामयाब हुईं। सपा जिलाध्यक्ष के अलावा भी संगठन के कुछ लोग भी उन्हें मजबूत मनाते हुए पार्टी में पैरोकारी कर रहे थे।
राजनीतिक परिवार से अर्चना सिंह
निर्दल प्रत्याशी अर्चना सिंह इसौली के पूर्व विधायक रहे स्व. इंद्रभद्र सिंह की बेटी, पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू व पूर्व प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू की छोटी बहन हैं। दोनों भाइयों का राजनीति में उच्च स्तर तक खासी पैठ है। पहले तो दोनों भाइयों ने अपनी बहन को राजनीतिक दल से उतारने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिलने पर निर्दल मैदान में उतारा है। पूर्व प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू स्वयं पिछला आम व उप जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव लड़ चुके हैं। चुनाव में वे ही मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे।