लखनऊ। कोरोना काल में माता-पिता को खोने वाले नौ साल के इश्लोक ने सरकारी मदद के नाम पर होने वाली कार्रवाई की पोल भी खोल दी है। प्रशासन की ओर से अब की जा रही उसकी सहायता तो ठीक है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि वह समय पर मदद पाने से चूक कैसे गया? शासन के आदेश के बाद पूरे जिले में ऐसे बच्चों की तलाश प्रशासन और दूसरी एजेंसियों ने की थी। कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी इसमें जुटी थीं। 800 से अधिक बच्चों को बाल कल्याण सहायता के रूप में चार हजार रुपये मासिक की आर्थिक मदद दिलाई गईं, लेकिन इस सूची में इश्लोक का नाम नहीं था। वह खुद डीएम के पास न पहुंचता तो शायद मदद से वंचित ही रहता।
प्रशासन व संबंधित अधिकारियों के पास इसका स्पष्ट जवाब नहीं है। डीपीओ विकास सिंह का कहना है कि इश्लोक के रिश्तेदारों की ओर से भी कोई आवेदन नहीं मिला, जबकि लगातार ऐसे बच्चों की तलाश के लिए प्रचार-प्रसार तक कराया गया। चाचा का कहना है कि इश्लोक के नाना किसी वजह से आवेदन नहीं करा पाए। उनकी मौत के बाद मकान पर कब्जा हुआ तो कागज खो गए। ऐसे में आवेदन नहीं हो पाया।
अब पढ़ सकेगा इश्लोक
इश्लोक का कहना है कि खुशी है कि अब वह फिर से पढ़ सकेगा। कांशीराम कॉलोनी सदरौना के स्कूल की पहली कक्षा में पढ़ रहे इश्लोक की पढ़ाई माता-पिता की मौत के बाद छूट गई थी। अब उनकी इच्छा पूरी होगी। डीएम ने अटल आवासीय स्कूल में इश्लोक के प्रवेश की प्रक्रिया शुरू करा दी है।
डूडा ने दिलाया मकान पर कब्जा
डूडा के परियोजना अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने नाना मिश्रीलाल की वसीयत के मुताबिक इश्लोक को उनके नैपियर रोड स्थित लाल कॉलोनी के मकान पर कब्जा दिलाया। इस दौरान चाची विनीता मौजूद रही। अभी मासूम कटरा चौपटिया में चाचा सोनू के साथ रहता है। सोनू ने बताया कि 16 जनवरी 2021 को इश्लोक के पिता दीपक कुमार की मौत हो गई। वह ई-रिक्शा चलाते थे। फिर 11 नवंबर 2021 को मां विजयलक्ष्मी का भी निधन हो गया। सात अक्तूबर 2022 को उसके नाना मिश्रीलाल की भी मौत हो गई। तबसे वह उनके साथ रह रहा है। अमीनाबाद की दुकान में पांच हजार रुपये की नौकरी करने वाला सोनू के तीन बच्चे हैं। ऐसे में वह इश्लोक की पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पा रहा था।
आपदा राहत कोष से मिलेंगे 50 हजार रुपये
मकान पर कब्जा मिलने के बाद इश्लोक मंगलवार को भी डीएम सूर्यपाल गंगवार से मिलने पहुंचा। उन्होंने चाची को उसकी ठीक से देखभाल करने के लिए कहा। आधार अपडेट नहीं होने से मंगलवार को इश्लोक का बैंक खाता नहीं खुल सका। बुधवार को खाता खुलने के बाद आपदा राहत कोष से 50 हजार रुपये ट्रांसफर हो जाएंगे। पीएम केयर फंड में भी पंजीकरण करा दिया गया है। इसके लिए सीएमओ ने अपनी रिपोर्ट बनाकर दे दी। तहसील ने भी सत्यापन कर इश्लोक को आर्थिक मदद पाने का हकदार बताया है।
23 वर्ष का होने पर मिलेगा पैसा
डीपीओ विकास सिंह ने बताया कि इश्लोक को चार हजार रुपये मासिक की मदद एक अप्रैल से मिलने लगेगी। छह-छह महीने की दो किस्त में पैसा अभिभावक के साथ खुले संयुक्त खाते में आएगा। पीएम केयर से मिलने वाले 10 लाख रुपये इश्लोक और संरक्षक के रूप में डीएम के साथ संयुक्त खाते में रहेंगे। 23 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद डीएम की सहमति से यह पैसा इश्लोक जरूरत के लिए निकाल सकेगा। कुछ आवश्यक जरूरतों के लिए भी आंशिक रूप से निकासी डीएम की सहमति से हो सकती है।