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खुलासा: यूपी में गायब हो गए 6.22 लाख पुराने बिजली मीटर, लाखों के नुकसान होने की आशंका; जांच की मांग

Tue, 02 Sep 2025 11:03 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Electricity meter in UP: यूपी में स्मार्ट बिजली प्रीपेट मीटर में बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रदेश में लगे 38.28 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर के बदले निकाले गए 6.22 लाख पुराने मीटर अभी तक जमा नहीं हुए हैं।
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पुराने मीटरों में सामने आया फर्जीवाड़ा।
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विस्तार
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प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की आड़ में बिजली यूनिट घोटाला हो गया है। प्रदेश में लगे 38.28 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर के बदले निकाले गए 6.22 लाख पुराने मीटर अभी तक जमा नहीं हुए हैं। इन मीटरों की यूनिट अब निगमों को पता नहीं चलेगी। ऐसे में निगम उपभोक्ताओं से बिल नहीं वसूल पाएंगे। उन्हें लाखों रुपये का नुकसान होना तय है।

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सीतापुर में स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पूरे प्रदेश में हलचल मची हुई है। गोंडा, बहराइच, बलरामपुर ही नहीं पूरे प्रदेश में इस तरह की गड़बड़ी हुई है। स्मार्ट मीटर लगाने के बाद पुराने मीटरों को जमा करना होता है ताकि ब्रट इन (मीटर की जांच) कर लिया जाए और संबंधित मीटर में दर्ज यूनिट को उपभोक्ता के खाते में जोड़ दिया जाए। मीटरों के डिस्प्ले नष्ट करने, मीटर रीडिंग शून्य करने, सील व कवर टूटने की वजह से निगमों को लाखों रुपये की चपत लगी है। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक 29 अगस्त तक कुल 38 लाख 28 हजार 925 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, जिसमें 6 लाख 22 हजार 568 पुराने मीटर विभाग को वापस नहीं किए गए हैं। इन सभी उपभोक्ताओं की पुरानी बिलिंग गायब है और नई बिलिंग नहीं शुरू हो पाई है।

किस निगम में कंपनियों ने अभी नहीं लौटाए पुराने मीटर

पूर्वांचल जीएमआर-जीनस -242275
मध्यांचल पोलरिस- इनटैली -  92969
दक्षिणांचल जीएमआर- जीनस -134197
पश्चिमांचल इनटैली स्मार्ट -145123
केस्को जीनस   - 8000

विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से मनमानी- वर्मा

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर की आड़ में करोड़ों का खेल चल रहा है। हफ्ते में दो बार स्मार्ट प्रीपेड मीटर की समीक्षा करने वाला पावर कार्पोरेशन प्रबंधन व बिजली कंपनियां अपने पुराने मीटरों का खोज नहीं लीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन निजी घरानों जीएमआर, पोलरिस, जीनस एवं इनटैली स्मार्ट को लगभग 27342 करोड़ का आर्डर दिया गया है, वे सभी विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से मनमानी पर उतारू हैं। इस मनमानी का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने हैं। ऐसे में इसी प्रकार का खेल चलता रहा तो एक बड़ा घोटाला सामने आएगा। गोंडा और बलरामपुर में जिस तरह से लेजर से डिस्प्ले डैमेज करके रीडिंग गायब की गई, यह साबित करता है कि जानबूझ कर खेल किया गया है।
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाले से खतरे में पड़ सकता है एरियर- समिति

 विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आशंका जताई है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाले की आड़ में विद्युत वितरण निगमों का 1.15 लाख करोड़ का एरियर फंस सकता है। संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि निजीकरण के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के नाम पर बड़े पैमाने पर खेल हुआ है। इसकी किसी एजेंसी से जांच कराई जाए।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारिरयों ने कहा कि जिस तरह से सीतापुर, गोंडा सहित अन्य स्थानों पर मामला सामने आया है, उससे बड़ी साजिश की गंध आ रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि विद्युत वितरण निगमों का उपभोक्ताओं पर लगभग 1.15 लाख करोड का राजस्व बकाया है। कार्पोरेशन प्रबंध के अनुसार 1.10 लाख करोड का घाटा है। बकाया वसूल लिया जाए तो निगम करीब पांच हजार करोड़ के मुनाफे में आ जाएंगे। जिस तरह से करीब छह लाख मीटर अभी तक निगमों को लौटाए नहीं गए हैं और ज्यादातर की रीडिंग शून्य कर दी गई है, वह बड़े घोटाले का संकेत है। इसकी किसी एजेंसी से जांच कराई जाए। वर्ष 2017 के मापदंडों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 20 कर्मचारी और शहरी क्षेत्र में 36 कर्मचारियों का नियम था। बड़े पैमाने पर संविदा कर्मचारियों की छंटनी हुई। अब शहरी क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 18:30 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में प्रति सर्विस स्टेशन 12ः 5 कर्मचारी का मानक बनाकर संविदा कर्मी निकाले जा रहे हैं।
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