विश्व प्रसिद्ध मलिहाबादी दशहरी की लगातार तीन फसलें आपदा, अफवाह और वायरस के कहर से चौपट हो गईं। वर्ष 2018 में पश्चिम बंगाल के मालदा आम में निपाह वायरस पाए जाने के बाद शौकीनों ने दशहरी से भी किनारा कर लिया था तो 2019 में बिगड़े मौसम ने कारोबार प्रभावित किया। अब कोरोना के चलते कारोबार चौपट होने की कगार पर है। लगातार तीन फसलों में नुकसान के चलते यह स्थिति हो गई है कि कई बागवान इस मुख्य व्यवसाय से किनारा करने का मन बनाने लगे हैं। बागवानों का कहना है कि जिस तरह से हर वर्ष आम की फसल के सामने नई नई चुनौतियां आ रही हैं, उससे अब उससे निपटना आसान नहीं लग रहा है। ऐसे में बेहतर यही है कि इस व्यवसाय से दूरी बना ली जाए।
वर्ष 2018 में पश्चिम बंगाल के मालदा आम को चमगादड़ों ने काफी नुकसान पहुंचाया था। उनके खाए आमों की जांच में निपाह वायरस होने की बात सामने आई तो अफवाह के चलते दशहरी से भी खरीदारों ने दूरी बना ली। व्यापारियों ने लोडिंग बंद कर दी और लोकल मंडियों आम पट गया। हालांकि विशेषज्ञों ने दशहरी में वायरस न होने का व्यापक प्रचार किया, लेकिन इसके बाद भी दशहरी को खरीदार नहीं मिले।
2019 में मौसम की बदमिजाजी व दैवीय आपदा से फसल काफी कमजोर रही और अब 2020 में करोना वायरस कहर बरपा रहा है। फलपट्टी क्षेत्र में अमूमन एक जून से आम की टूट हो जाती है। इस वर्ष भी ऐसा हुआ और शुरुआती दो तीन दिन तो बागवानों के लिए राहत भरे रहे, लेकिन 15 जून से फिर से संपूर्ण लॉकडाउन की अफवाह ने एक बार फिर आम को गर्त में धकेल दिया। व्यापारियों ने लोडिंग बंद कर दी, जिससे लोकल मंडियों आम पट गया। अब मंडी पहुंचने वाले आम को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। दूसरी तरफ डाल पर भी आम का पकना शुरू हो गया है, जिससे बागवान और भी परेशान हैं।
तिलसुवा गांव निवासी बगवान निरंजन सिंह का कहना है कि दुश्वारियों के चलते अब आम के कारोबार से डर लगने लगा है। पिछले तीन सालों से आम का व्यापार चौपट हुआ है। इस दौरान हुए नुकसान की भरपाई करना मुश्किल है। आज मंडियों में आम बिक नहीं रहा है और दशहरी नौरोज की तरफ बढ़ रहा है। जिस दिन से नौरोज शुरू होगा उसी दिन से दशहरी की उल्टी गिनती भी शुरू हो जाएगी, जिसे संभालना मुश्किल होगा।
हिमाबाद क्षेत्र के बड़े बगवान मीनू वर्मा ने बताया कि पिछले तीन सालों में आम की लागत निकलना मुश्किल हो गया है। अब ऐसा कारोबार करने से क्या फायदा, जिसमें सिर्फ और सिर्फ नुकसान का ही सामना करना पड़े। अब आम के कारोबार के लिए आगे का समय भी ठीक नहीं दिख रहा है। मंडी में 12 से 15 रुपये किलो आम बिक रहा है, लेकिन व्यापारी इतने पर भी खरीद में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। आढ़ती सुफियान खां ने बताया कि मंडी में आम है, लेकिन खरीदार नहीं हैं। अब डाल का आम भी मंडी में आने लगा है, जो लोकल मंडियों लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, बरेली आदि में ही बिकेगा। इन मंडियों में पूरा आम खपाना मुश्किल होगा।