आए दिन ही कोई न कोई ऐसा बयान आ रहा है, जिसे मर्यादा की सीमाओं में नहीं रखा जा सकता। क्या आपको भी लोकसभा चुनाव जहरीला होता नजर आ रहा है?
मिसाल के तौर पर ‘मौत का सौदागर..’, ‘जहर की खेती करने वाला...’,‘खूनी पंजा’ ‘जालिम हाथ’ और फिर ‘...नपुंसक’ इन्हें ही ले लीजिए।
सियासत में विरोधियों पर वक्त-बेवक्त ऐसे बोल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद जैसे दिग्गज नेताओं की जुबान से निकले है।
ये विष-वचन पूर्व मंत्री रशीद मसूद के भ्ातीजे और सहारनपुर से कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद की जुबान में ‘बोटी-बोटी कर डालने’ और कैराना सीट से सपा प्रत्याशी नाहिद हसन के ओछे बयान तक पहुंच गए हैं।
दिनोंदिन गिर रहा शब्दों का स्तर
16 वीं लोकसभा का चुनाव जैसे-जैसे रफ्तार पकड़ रहा है, वोटों के ध्रुवीकरण की यह लड़ाई वैसे-वैसे तेज होती जा रही है।
केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा, सियासी संत प्रमोद कृष्णम और धर्मार्थ कार्य विभाग के सलाहकार चौधरी साहब सिंह जैसे नेता भी चर्चा में बने रहने के लिए विवादास्पद बयानों से परहेज नहीं रखते।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव वरुण गांधी भड़काऊ भाषण को लेकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर तक काटने पड़े थे। बावजूद इसके, ऐसे बयानवीरों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।
हमेशा सियासी नफा-नुकसान के बारे में सोचने वाले नेता इस पर भी ध्यान नहीं देते कि ऐसे बयान उल्टे भी पड़ सकते हैं।
सोनिया के वार से जीते थे मोदी
सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी के लिए मौत का सौदागर वाला बयान तो दिया गुजरात के मुसलमानों की सहानुभूति पाने के लिए, मगर मोदी ने अपने सियासी कौशल से इस बयान का भरपूर फायदा उठाया और चुनाव जीता।
इसी तरह चौधरी साहिब सिंह यह भूल गए कि वह अपने नेता अखिलेश यादव की लंगूर से तुलना कर उनका मान कर रहे हैं या अपमान?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी साबिर अली को पार्टी में शामिल करने का विरोध ट्वीट से करते हैं।
नतीजा यह निकलता है कि उन्हें मानहानि तक की धमकी का सामना करना पड़ता है।
सत्ता की लालसा में फिसल रही जुबां
लखनऊ विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर केसी पांडेय की नजर में इसके पीछे चुनाव जीतने और सत्ता पाने की लालसा है।
यही वजह है कि बड़े-बड़े नेता बाणी की पवित्रता व सार्वजनिक जीवन की मर्यादा भूल जाते हैं।
पांडेय कहते हैं कि बड़े नेता विचारों व कार्यक्रमों से लोगों का मन जीतने की जगह अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।
ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद और सपा प्रत्याशी नाहिद हसन जैसे नवोदित नेताओं से अपेक्षा ही क्या की जा सकती है? अब जिम्मेदारी मतदाताओं की बढ़ जाती है।
पढ़िए, मोदी पर कैसे-कैसे विष वचन
मौत का सौदागर: सोनिया गांधी ने 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए। मोदी ने अपने सियासी कौशल से सोनिया के इस बयान का फायदा उठाया और चुनाव जीता।
जहर की खेती करने वाला : सोनिया ने मोदी के लिए।
नपुंसक: विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने मोदी के लिए।
मोदी का जवाब, जालिम हाथ : मोदी ने कांग्रेस के लिए।
खूनी पंजा : नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के लिए। शिकायत चुनाव आयोग तक।
... और हाल में इन्होंने उगला जहर
मसूद ने मोदी के खिलाफ उगली आग
टीवी चैनल व यू-ट्यूब पर एक वीडियो में सहारनपुर के कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद ने मोदी के खिलाफ आग उगली।
28 मार्च को सामने आए इस वीडियो के बाद उन्हें गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मोदी के नाम की ज्यादा दहशत
संभल से कांग्रेस प्रत्याशी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मोदी पर कहा कि इस मुल्क में आम आदमी इंडियन मुजाहिदीन से जितना डरता है, उससे ज्यादा दहशत तो उसमें नरेंद्र मोदी के नाम का है।
इन बयानों से शर्मसार हुई मार्यादा
कैराना से सपा प्रत्याशी नाहिद हसन मायावती पर टिप्पणी करते समय मर्यादा भूल गए। कहा, ‘मायावती को एक बार मेरे बाबा ने हराया था। इसके बाद मेरे बाप से उनका पाला पड़ा। इस बार उसके पूत से पाला पड़ा है। साथियों अब पागल हाथी कभी कैराना-शामली की तरफ नहीं आएगा।’
नाहिद ने मोदी और माया को लेकर ऐसी ओछी टिप्पणी भी की जिसे प्रकाशित नहीं किया जा सकता।
मोदी बंदर, अखिलेश लंगूर: चौधरी
धर्मार्थ कार्य के सलाहकार चौधरी साहब सिंह ने बागपत में सपा उम्मीदवार गुलाम मोहम्मद के प्रचार के दौरान यह कह बैठे कि मोदी बंदर हैं, और बंदर को भगाने के लिए लंगूर को बुलाया जाता है। अखिलेश जी वो लंगूर हैं जो मोदी को भगाएंगे।