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गायत्री प्रजापति की कंपनी के पूर्व निदेशक ने सरकारी गवाह बनने के लिए ईडी को भेजा पत्र

Sat, 19 Sep 2020 02:23 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति - फोटो : amar ujala
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गायत्री प्रसाद प्रजापति की कंपनी के पूर्व निदेशक बृज भवन चौबे ने प्रवर्तन निदेशालय को पत्र भेजकर सरकारी गवाह बनाने की इच्छा जताई है। बृज भवन का कहना है कि पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने अवैध खनन में कई करोड़ की बेनामी संपत्तियां बनाई हैं। सरकारी गवाह बनकर वह गायत्री की सारी बेनामी संपत्तियों का ब्यौरा देना चाहते हैं।
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बृज भवन चौबे ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक को संबोधित पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि निदेशालय की तरफ से गायत्री के अवैध खनन से करोड़ों रुपया कमाने की विवेचना चल रही है। अवैध खनन से गायत्री ने अपने व अपने परिवारीजनों के अलावा रिश्तेदारों और कर्मचारियों के नाम से सैकड़ों करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां अर्जित की हैं। गायत्री ने अपने खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला को पक्षद्रोह होने के लिए उनके प्लाट दिलाए। कई संपत्तियां बेचकर उसे नकद रुपया दिलाया। गायत्री के काले धन और बेनामी संपत्तियों के बारे में जो जानकरी है, उसे सरकार को बताकर वह सहयोग करना चाहते हैं इसलिए उन्हें सरकारी गवाह बनाया जाए।

मालूम हो कि खरगापुर के सरस्वतीपुरम निवासी बृज भवन चौबे पूर्व मंत्री की कंपनियों में निदेशक थे। गायत्री ने उनकी जमीन और प्लाट रेप का आरोप लगाने वाली चित्रकूट की महिला को दिला दिए थे। बृज भवन का आरोप है कि प्लाट और जमीनों का रुपया मांगने पर गायत्री ने उन्हें धमकाकर भगा दिया। कंपनी के निदेशक पद से भी हटा दिया और वेतन नहीं दिया। उन्होंने बीते दिनों गोमतीनगर विस्तार में गायत्री, उनके बेटे अनिल प्रजापति और रेप का आरोप लगाने वाली महिला समेत अन्य अज्ञात लोगों पर धोखाधड़ी व जानमाल की धमकी देने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी।
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गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी का केस दर्ज कराने वाले उनकी कंपनी के पूर्व निदेशक बृज भवन चौबे ने प्रवर्तन निदेशालय को पत्र भेजकर सरकारी गवाह बनाने की मांग की है। बृज भवन का कहना है कि गायत्री के पास सैकड़ों करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियां हैं जिसकी जानकारी उन्हें है। अगर प्रवर्तन निदेशालय उन्हें सरकारी गवाह बनाता है तो वह पूर्व मंत्री की अधिकांश संपत्तियों का ब्यौरा साक्ष्यों के साथ दे सकते हैं।
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