रायबरेली । शहर के खालीसहाट मोहल्ले में रविवार सुबह उस समय भगदड़ मच गई, जब ऐतिहासिक पीली कोठी तेज आवाज के साथ भरभराकर ढह गई। भवन के मलबे की चपेट में आकर दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि हादसे के दौरान कोठी के आसपास कोई मौजूद नहीं था। अचानक भवन के गिरने से राहगीरों में अफरातफरी मच गई।
मोहल्ला खाली सहाट में बनी पीली कोठी का एक बड़ा हिस्सा रविवार को गिर गया। यह कोठी साल 1888 में बनी थी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मीर वाजिद अली ने इसका निर्माण कराया था। नागरिक अली सरवर ने बताया कि मीर वाजिद अली के निधन के बाद इस कोठी की देखरेख मुतवल्ली की ओर से की जाती थी। पिछले कई वर्षों से यह कोठी जर्जर हो गई थी। इसे लेकर प्रशासन को भी अवगत कराया गया था।
भवन को संरक्षित करने के लिए वक्फ बोर्ड और पुरातन विभाग को भी पत्र लिखे गए। भवन जर्जर होने के कारण इसके आसपास किसी को जाने नहीं दिया जाता था। दो साल पहले भवन में एक दरार बन गई थी, जिस कारण इसके गिरने की आशंका बनी हुई थी।
उधर, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी स्वर्ण सिंह ने बताया कि भवन ढहने की सूचना मिली है, लेकिन उसका पालिका से कोई लेनादेना नहीं है।
कांग्रेस के संस्थापक एओ ह्मूम ने यहां की थी बैठक
करीब 6.5 बिस्वा में बनी यह कोठी अंग्रेजी हुकूमत के दौरान हुए सितम की गवाह रही है। पीली कोठी में कांग्रेस के पहले संस्थापक एओ ह्मूम और एनी बेसेंट ने बैठक की थी। क्रांतिकारी मीर बकार को उनके 18 साथियों के साथ सन 1900 में अंग्रेजी पुलिस ने इसी कोठी से गिरफ्तार किया था।
कभी भी गिर सकता कोठी का पिछला हिस्सा
रविवार को अचानक भवन के आगे का एक हिस्सा हल्का दरका तो लोग इधर-उधर हो गए और फिर देखते ही देखते इमारत का अगला पूरा हिस्सा गिर गया। पीली कोठी के गिरते ही खाली सहाट में अफरातफरी मच गई। सड़क से गुजर रहे लोग जहां थे वहीं पर ठिठक गए। भवन जब गिरा तो उसके मलबे से एक ई-रिक्शा और कार क्षतिग्रस्त हो गई। काफी देर तक सड़क पर यातायात रुका रहा। उसके बाद स्थिति सामान्य हुई। पीछे का हिस्सा भी पूरी तरह से जर्जर है और उसके भी कभी भी गिरने की आशंका है।