रायबरेली। जिले में बिजली व्यवस्था और बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार की विद्युत सुधार योजना (रिवैंप) धरातल पर उतरने वाली है। यूनिवर्सल कंपनी ने जिले में पहले चरण का काम कराने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। पहले चरण में ढीले तारों को दुरुस्त किया जाएगा। नए खंभे के अलावा एबीसी केबल लगेंगे। इससे बिजली चोरी पर लगाम लगेगी। योजना पर करीब 264 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पांच लाख 31 हजार उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली मिलेगी।
शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में 54 विद्युत उपकेंद्र हैं। इनसे निकलने वाले फीडर के तार जर्जर हैं। 33 केवी लाइन के तार जर्जर हैं। कोई लाइन 20 तो कोई 40 साल पुरानी है। यही वजह है कि हवा चलने पर गांवों और शहरों की बिजली गुल हो जाती है। फीडरों की लंबाई अधिक होने की वजह से उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज की समस्या झेलनी पड़ रही थी। इस समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने रिवैंप योजना शुरू की है। कार्यदायी एजेंसी ने सर्वे शुरू कर दिया है। फरवरी में सर्वे का काम पूरा कर मार्च में काम शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है।
गर्मी के सीजन में मिलेगी राहत
गर्मी में बिजली की खपत अधिक होती है। फाॅल्ट की वजह से उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ती है। कभी हल्की हवा चलने पर बिजली के तार टूट जाते हैं तो कभी पोल टूट जाते हैं। इस वजह से बिजली गुल रहती है। बिजली आपूर्ति को बहाल करने में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को परेशानी करनी पड़ती है। रिवैंप योजना के धरातल पर उतरने से बिजली व्यवस्था पटरी पर आ सकेगी। गर्मी के सीजन में बेहतर तरीके से बिजली आपूर्ति की जा सकेगी।
रिवैंप योजना में पहले चरण का काम शुरू कराने के लिए सर्वे चल रहा है। कार्यदायी एजेंसी यूनिवर्सल कंपनी को मार्च में काम शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं। योजना में जर्जर तार बदले जाएंगे। योजना में 264 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
वाईएन राम, अधीक्षण अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन