ग्वालियर। मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी डिजिटल ठगी का खुलासा करते हुए पुलिस की एसआईटी टीम ने लखनऊ के अलग-अलग इलाकों से 10 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने ग्वालियर स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी स्वप्रदीप्तानंद से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.5 करोड़ रुपये की ठगी की थी।
इस मामले में पहले भी नौ आरोपियों को दिल्ली और उज्जैन से गिरफ्तार किया जा चुका है। हाल ही में गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि वे कमीशन पर लोगों से बैंक खाते लेकर उनमें अवैध ट्रांजेक्शन करते थे। सेविंग अकाउंट के बदले 30 हजार रुपये और करंट अकाउंट के बदले एक लाख रुपये तक दिया जाता था।
ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के अनुसार एसआईटी की जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 30 लाख रुपये लखनऊ के इंडसइंड बैंक में ट्रांसफर हुए थे। जब पुलिस ने बैंक अकाउंट की जांच की तो पाया गया कि वह खाता भी कमीशन पर उपलब्ध कराया गया था। आरोपी ''''रूद्र इंटरप्राइजेज'''' नाम की फर्जी फर्म बनाकर ट्रांजेक्शन करते थे। फर्म के अकाउंट होल्डर की उम्र केवल 20 साल है।
ये आए गिरफ्त में
लाल कुआं निवासी शौर्य (21), लखीमपुर खीरी के अर्सलान (22), मो. अकरम खान (21), शिवांश (21), लखनऊ के सचित (29), सीतापुर के सुल्तान मंसूर अली (22), गुजरात के रवि (22), गोरखपुर के शिवम सिंह (21), प्रतापगढ़ के विनायक प्रताप सिंह (20) और विकासनगर के हिरतेश (19)।
दिल्ली-नोएडा के दो बैंक खातों में भेजी गई थी रकम
इसके अलावा दिल्ली के बैंक ऑफ बड़ौदा में बीबीए छात्र वरदान के खाते में 2.5 लाख रुपये और यस बैंक में बीए द्वितीय वर्ष के छात्र गुरजीत के खाते में 2.8 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। प्रयागराज स्थित इंडसइंड बैंक के एक खाते में सबसे बड़ी रकम ₹1.30 करोड़ पहुंचाई गई थी, जिसे तुरंत 20 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। पुलिस इस गिरोह के अन्य सहयोगियों की तलाश और ठगी की रकम की बरामदगी के प्रयास में जुटी है।