चित्रकूट जेल में माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक पुत्र अब्बास अंसारी को गैरकानूनी तरीके से अपनी पत्नी निखत से मुलाकात कराने और जेल से भागने की साजिश रचने के मामले की जांच करने वाले डीआईजी जेल शैलेंद्र मैत्रेय को पदावनत किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीआईजी शैलेंद्र मैत्रेय को पदावनत करने की अनुमति दे दी है। कारागार मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रमुख सचिव कारागार जल्द इस संबंध में आदेश जारी करेंगे।
दरअसल, डीआईजी जेल शैलेंद्र मैत्रेय को नियम विरुद्ध तरीके से पदोन्नत करने का आरोप लगा था। उनकी पदोन्नति शासन को करनी थी। विभागीय अधिकारियों ने उनको मई, 2022 में वरिष्ठ जेल अधीक्षक से डीआईजी बना दिया। इसकी शिकायत होने पर जांच करायी गयी, जिसमें आरोप सही पाए गए। बताते चलें कि शैलेंद्र मैत्रेय को वर्ष 2007 में बस्ती जेल का अधीक्षक रहने के दौरान निलंबित किया गया था।
जेल में बंद सपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष रामवृक्ष यादव ने अपने जन्मदिन पर जश्न मनाया था। इसकी जांच में जेल अधीक्षक शैलेंद्र मैत्रेय की भूमिका संदिग्ध मिलने पर शासन ने उनको निलंबित कर दिया। शासन के फैसले के खिलाफ उन्होंने ट्रिब्यूनल में अपील की, जिसने उनके दंड आदेश को निरस्त कर दिया।
तत्पश्चात राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की जहां शासन के दंड आदेश को बहाल कर दिया गया। इसके बावजूद जेल विभाग के अफसरों ने उनको प्रोन्नत कर दिया। हाल ही में लखनऊ जेल में बंद शाइन सिटी के आरोपियों के पॉवर ऑफ अटॉर्नी करने के मामले की जांच शैलेंद्र मैत्रेय को दी गयी थी। उन पर आरोपियों की मदद करने का आरोप लगने के बाद जांच दूसरे अधिकारी को दे दी गयी थी।
चित्रकूट जेल मामले की जांच की थी
शैलेंद्र मैत्रेय ने हाल ही में चित्रकूट जेल जाकर अब्बास अंसारी और उसकी पत्नी की गैरकानूनी तरीके से होने वाली मुलाकात के प्रकरण की जांच की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट डीजी जेल को सौंपी थी जिसमें चित्रकूट जेल के कई अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया है। विवादों से घिरे अफसर से जांच कराने को लेकर कई सवाल भी उठने लगे हैं।