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विधानसभा पहुंचा 70 हजार लीटर डीजल चोरी का मामला, विधायक बोले- आरोपी को मंत्री का संरक्षण

Mon, 10 Sep 2018 02:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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परिवहन निगम के अफसरों के एक गुट द्वारा बरेली में 70 हजार लीटर डीजल चोरी के मामले में आरोपियों पर कार्रवाई न होने व भ्रष्टाचार का प्रकरण विधानसभा पहुंच गया है। विधायक ने मामला उठाया तो शासन ने परिवहन निगम से जांच रिपोर्ट व दस्तावेज तलब किए हैं। इससे उन आरोपियों व अफसरों में हड़कंप मचा है जो पिछले चार साल से प्रकरण की जांच नहीं कर रहे थे।

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कन्नौज सदर विधायक अनिल कुमार दोहरे ने विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को पत्र देकर नियम 51 के माध्यम से अवगत कराया कि परिवहन निगम में हरदोई के क्षेत्रीय प्रबंधक पद पर कार्यरत मनोज त्रिवेदी सहित आधा दर्जन लोगों पर डीजल चोरी करने का आरोप है।

त्रिवेदी सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक होने के बाद भी हरदोई परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक के पद पर काबिज हैं। वह संविदा परिचालकों की भर्ती में गड़बड़ी करने व बरेली में तैनाती के दौरान 70 हजार लीटर डीजल की चोरी में आरोपित हैं। विधायक ने कहा कि मुख्यालय में जांच से जुड़े एक अफसर से सभी आरोपियों की साठगांठ होने के कारण भ्रष्टाचार की जांच नहीं की जा रही है।
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इस अफसर को एक मंत्री का भी संरक्षण हासिल है। इसलिए प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराते हुए सभी आरोपियों की संपत्ति की भी जांच कराई जाए। इस पर शासन के अनुसचिव ने प्रबंध निदेशक पी. गुरु प्रसाद को 29 अगस्त को गोपनीय पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट मांगी है।

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पूर्व एमडी ने किया था खुलासा

निगम के पूर्व एमडी मुकेश मेश्राम ने अप्रैल-2014 में बरेली डिपो में डीजल चोरी के मामले का खुलासा किया था। मनोज त्रिवेदी उस वक्त बरेली में तैनात थे। इस मामले की एमडी से गोपनीय शिकायत हुई थी, लेकिन जांच शुरू होते ही मुकेश मेश्राम हट गए और प्रकरण ठंडे बस्ते में चला गया। बाद में इस मामले की जांच मुख्य प्रधान प्रबंधक (प्रशासन ) को सौंपी गई थी।

नहीं हुआ निलंबन
परिवहन निगम के नियम में प्रावधान है कि जो आरोपी जांच में सहयोग न करे यानी बयान न दे तो उसे तत्काल निलंबित कर देना चाहिए, लेकिन अफसरों का संरक्षण होने के कारण क्षेत्रीय प्रबंधक व अन्य को निलंबन से बचा लिया गया।
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