ठंड के मौसम को चिकित्सक भले ही हेल्दी सीजन कहते हैं लेकिन बीमारी फैलाने वाले वायरस सर्दी के मौसम में भी तेजी से बढ़ते हैं और इसके सबसे ज्यादा शिकार छोटे बच्चे हो रहे हैं।
रोट्रो और नोरो वायरस से पीड़ित बच्चों को विंटर डायरिया की शिकायत हो रही है। इस बीमारी से पीड़ित कई बच्चों को बलरामपुर और सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका कई दिनों से इलाज चल रहा है।
बलरामपुर और सिविल अस्पताल का बाल रोग वार्ड विंटर डायरिया से पीड़ित बच्चों से भरा पड़ा है। आलम यह है कि विंटर डायरिया से पीड़ित रोजाना चार से पांच बच्चे अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है कि विंटर डायरिया के मामले मुख्य रूप ठंड के शुरूआती दिनों में होते हैं। अगर इसके इलाज में लापरवाही बरती गई तो बच्चों की जान पर बन सकती है।
बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विभाग में 40 बेड हैं, जिसमें 25 से अधिक बच्चे विंटर डायरिया से पीड़ित हैं। भर्ती होने वाले बच्चों में नवल किशोर रोड के अनमोल (12), हरदोई के राहुल (9), ठाकुरगंज की रुचि (11), सुनीता (10) और पुराने लखनऊ के साहिल (13) समेत कई नवजात बच्चे भर्ती हैं।
जिनकी हालत अब सामान्य बताई जा रही है। ऐसे ही बलरामपुर अस्पताल में विंटर डायरिया से पीड़ित कई बच्चे भर्ती हैं। बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विष्णुलाल ने बताया कि विंटर डायरिया के सबसे ज्यादा मामले शुरूआती ठंड के दिनों में होते हैं।
इस दौरान बरती गई लापरवाही शरीर की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचती है और संक्रमण के चलते उल्टी-दस्त की समस्या शुरू हो जाती हे। उन्होंने बताया कि विंटर डायरिया सामान्य डायरिया की तरह होता है।
इसमें पीड़ित को सर्दी, जुकाम के साथ बुखार की शिकायत होती है, जिसके बाद बच्चे रोट्रो और नोरो वायरस की चपेट में आकर उल्टी दस्त के शिकार हो जाते हैं।
सिविल अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कंचन निगम सक्सेना ने बताया कि विंटर डायरिया बच्चों को ठंड लगने की वजह से होता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों की हालत ठीक है और उनकी हालत में तेजी से सुधार दर्ज किया जा रहा है।