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राजधानी में कोरोना संकट के बीच डायलिसिस कराने में खराब हो रही हालत

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राजधानी में कोरोना संक्रमण की रफ्तार अन्य बीमारियों से पीड़ितों के लिए भी बुरा सपना साबित हो रही है। इनमें किडनी की बीमारी से पीड़ितों की हालत और भी खराब है।
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इनमें डायलिसिस कराने वालों के लिए समस्या और भी बड़ी है। इस वक्त केजीएमयू में कुछ डायलिसिस हो रही हैं पर लोहिया और पीजीआई में ठप है। इसके चलते काफी समस्या हो रही है।
लखनऊ के तीन प्रमुख सरकारी संस्थानों केजीएमयू, लोहिया संस्थान और पीजीआई में डायलिसिस की व्यवस्था है।
केजीएमयू के शताब्दी फेज-1 में नॉन कोविड मरीजों के लिए डायलिसिस यूनिट पीपीपी मॉडल पर चलाई जा रही है। यहां 20 डायलिसिस मशीन के साथ दो यूनिट लगाई गई हैं। इससे 24 घंटे नॉन कोविड मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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वहीं, कोविड का बहाना बनाकर राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल और एसजीपीजीआई में इस वक्त नॉन कोविड मरीजों के लिए डायलिसिस की व्यवस्था बंद कर दी गई है।
इसके चलते नॉन कोविड किडनी के मरीज दम तोड़ दे रहे है। उनको निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है, जहां नॉन कोविड के कारण उनका दाखिला नहीं हो पा रहा है। कई तो खर्च की व्यवस्था न कर पाने के कारण डायलिसिस नहीं करा पा रहे हैं।
केजीएमयू में पीपीपी मॉडल पर व्यवस्था
लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे के अनुसार, केजीएमयू में पीपीपी मॉडल पर 20 डायलिसिस यूनिट लगाकर नॉन कोविड मरीजों को 24 घंटे सेवा दी जा रही है। इसका खर्च वहन न कर पाने वालों के लिए सरकार की तरफ से व्यवस्था नि:शुल्क है। जो नि:शुल्क सेवा के पात्र नहीं है उनसे 1200 में डायलिसिस किया जा रहा है और यह सेवा 24 घंटे चल रही है। वहीं, पीजीआई में छह नेफ्रोलॉजिस्ट और लोहिया संस्थान में दो नेफ्रोलॉजिस्ट होने के बावजूद वहां नॉन कोविड मरीजों का डायलिसिस नहीं हो पा रही है।
मुख्यमंत्री से शिकायत
लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने मामले की मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री से शिकायत की है। उनके अनुसार बाकी संस्थान में इस समय डायलिसिस होनी चाहिए। भले ही केजीएमयू की तर्ज पीपीपी मॉडल का पालन किया जाए।
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