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Lucknow News: मिनटों में स्तन कैंसर का पता लगा लेगी डिवाइस

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लखनऊ। स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर का सबसे प्रमुख प्रकार है। जांच के अभाव में काफी महिलाओं में इसकी जानकारी आखिरी स्टेज में होती है। अब ऐसी डिवाइस आ रही है, जिसे कुछ समय स्तन के पास रखना होगा और वह कैंसर की जांच कर देगी।
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केजीएमयू और आईआईटी कानपुर की साझा फेलोशिप- बायोडिजाइन-सिनर्जाइजिंग हेल्थकेयर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप फेलोशिप प्रोग्राम (एसआईबी-शाइन) हासिल करने वाले मेधावियों ने ऐसे ही कई डिवाइस बनाने में सफलता पाई है।

केजीएमयू के ब्राउन हॉल में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में पहले बैच के मेधावियों ने ये उपकरण पेश किए। इसके साथ सात मेधावियों संग दूसरे बैच की शुरुआत हुई। स्तन ट्यूमर की पहचान के लिए डिवाइस बनाने वाली श्रेया नायर ने बताया कि कृत्रिम स्तन पर ट्रायल में सफलता मिली है। जल्द ही यह वास्तविक ट्रायल और उपयोग के लिए तैयार होगा। श्रेया को इनोवेशन ने अगस्त में वूमेन ग्लोबल पिच कॉम्पिटिशन, लखनऊ चैप्टर फिनाले में दूसरा स्थान दिलाया था। उन्होंने निधि-ईआईआर से अनुदान प्राप्त किया, जिससे उनके स्टार्टअप, ब्रेला इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना हुई। इनोवेशन में डॉ. पूजा रमाकांत और डॉ. तुषार संधान ने परामर्श दिया। वर्ष 2022 में शुरू इस फेलोशिप कार्यक्रम का मकसद इंजीनियरिंग और मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर नए आविष्कार करना है। इस मौके पर मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा और केजीएमयू कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद, प्रो. ऋषि शेट्टी, पीएमआर विभाग के डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. सुधीर सिंह, आईआईटी कानपुर के डॉ. अमिताभ बंदोपाध्याय समेत कई लोग उपस्थित रहे।
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पैर लचकने वाले मरीजों के लिए उपकरण

इस फेलोशिप के पहले समूह के सदस्य कुशाग्र अस्थाना और पृथु प्रसाद ने पैर लचकने की समस्या वाले रोगियों के लिए उपकरण तैयार किया है। बायोस्टिम प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से इसे पेश किया गया है। इसमें डॉ. अनिल के गुप्ता, डॉ. गणेश और डॉ. अर्जुन रामकृष्णन ने मार्गदर्शन दिया।



उपकरण बताएगा सीपीआर का सही तरीका

किसी भी व्यक्ति को अचानक दिल का दौरा पड़ने या सांस रुकने पर सीपीआर बेहद अहम हो सकता है। आईआईटी कानपुर के आदित्य राज भाटिया ने सीपीआर सहायक उपकरण का प्रदर्शन किया, जो बताएगा कि सीपीआर सही ढंग से दिया जा रहा है या नहीं। उर्वशी और प्रो. बिशाक भट्टाचार्य ने इसमें मार्गदर्शन दिया।



तीन उपकरण सर्जरी को बनाएंगे आसान

फेलो सुमित कुमार वैश्य ने सर्जिकल परिशुद्धता बढ़ाने के लिए तीन उपकरण पेश किए। इनसे सर्जरी में आसानी होगी।



स्मार्ट मसल लोकेटर: केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. आनंद पांडे के सहयोग से इसे विकसित किया गया है। यह उपकरण अभूतपूर्व सटीकता के साथ स्फिंक्टर मांसपेशियों का पता लगाने में बाल रोग सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञों को मदद करता है।



पहनने योग्य वेंट्रिकुलो-पेरिटोनियल शंट मॉनिटर: केजीएमयू के न्यूरोसर्जन डॉ. अंकुर बजाज के साथ बनाया गया यह पहनने योग्य मॉनिटर हाइड्रोसिफलस रोगियों के लिए एमआरआई और सीटी स्कैन की जरूरतों को कम करता है।



कोरोनरी कैल्शियम के लिए परक्यूटेनियस डिवाइस: केजीएमयू के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषि सेठी और आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अंकुश शर्मा के सहयोग से विकसित इस डिवाइस से कोरोनरी समस्याओं का समाधान होगा। कई बार मरीजों को एंजियोप्लास्टी के बाद फिर से कैल्शियम जमने की समस्या होती है। ऐसे में दोबारा एंजियोप्लास्टी करनी होती है। इस डिवाइस से उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।



स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत कर रहा इनोवेशन

मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा, साल 2014 से जबसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली है, तबसे हालात बदले हैं। देश के स्वास्थ्य सेवाओं समेत हर क्षेत्र में नए इनोवेशन हो रहे हैं। कोविड वैक्सीन इसका बड़ा उदाहरण है। कहा कि हम गुलामी की मानसिकता को खत्म करेंगे तो अपने संतों और देश की धरोहर को जान सकेंगे। जिन आविष्कारों को आज दूसरे अपना बता रहे हैं, उन्हें हजारों साल पहले हमारे संतों ने खोज लिया था। उन्होंने अविष्कार करने वाले युवओं को बधाई देते हुए कहा कि इससे न सिर्फ मरीजों का जीवन बेहतर होगा, देश की अर्थव्यवस्था में भी सहयोग मिलेगा।
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