लखनऊ। वाहनों की मरम्मत के फर्जी बिल पास करके रेलवे को लाखों का चूना लगाने के आरोपी डीआरएम वाराणसी के सीनियर डीसीएम कार्यालय के तत्कालीन फिटर ग्रेड वन पीके दत्ता और फर्जीवाड़े में मदद करने के आरोपी सलीम अहमद खान को दोषी ठहराते हुए सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विजेश कुमार ने सात-सात साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पीके दत्ता पर एक लाख जबकि सलीम पर 90 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। मामले के अन्य आरोपी सरदार मोहन सिंह की मृत्यु हो गई थी।
कोर्ट में सरकारी वकील ने बताया कि मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें बताया गया था कि डीआरएम वाराणसी के सीनियर डीसीएम कार्यालय के फिटर ग्रेड वन पीके दत्ता ने 2006-2007 में तैनाती के दौरान अन्य आरोपियों वाराणसी के मेसर्स सलीम अहमद खान के सलीम और मेसर्स सरदार मोटर्स के सरदार मोहन सिंह के साथ साजिश रचकर सरकारी वाहनों की मरम्मत के क्रमशः 116 व 46 फर्जी बिल तैयार करके पास किए। इस तरह 25 लाख रुपये घोटाला कर हड़प लिए थे।