आवास विकास परिषद गाजियाबाद की तर्ज पर लखनऊ में भी किसानों को उनकी जमीन के बदले पहले से अधिक विकसित जमीन देगा।
इसके लिए परिषद ने स्लैब में बढ़ोतरी कर दी है। नई वृद्धि के तहत वृंदावन योजना के 1500 से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।
परिषद इन किसानों को उनसे अधिग्रहित भूमि के बदले अधिक विकसित जमीन देगा। नई व्यवस्था के तहत अब उन किसानों को जिनकी 0 से 2000 वर्ग मीटर जमीन अधिग्रहित हुई थी।
उन्हें 70 वर्ग मीटर,जिनकी आधा से एक एकड़ जमीन अधिग्रहित हुई है उनको 130 वर्गमीटर,1 से 2 एकड़ वाले को 250 वर्ग मीटर, 2 से 3 एकड़ वाले को 360 वर्ग मीटर और 3 एकड़ से अधिक वाले को 450 वर्गमीटर का भूखंड दिया जाएगा।
पूर्व में जिन किसानों की 0 से 2000 वर्ग मीटर जमीन अधिग्रहित हुई थी उन्हे 55 वर्ग मीटर, आधा से एक एकड़ वाले कोे 100 वर्गमीटर, 1 से 2 एकड़ वाले को 200 वर्ग मीटर, 2 से 3 एकड़ वाले को 300 वर्ग मीटर और 3 एकड़ से अधिक वाले को 400 वर्गमीटर भूखंड आवंटित करने का प्रस्ताव पास किया गया था।
आपसी समझौते के तहत दी जानी है जमीन
विवाद को समाप्त करने केलिए दो साल पहले आवास विकास परिषद व किसानों के बीच समझौता हुआ था। इसके बाद यह तय हुआ था कि अधिग्रहित जमीन के बदले किसानों को कितनी विकसित जमीन दी जाएगी।
इसके लिए एक प्रस्ताव भी तैयार किया गया था कि कितनी अधिग्रहित जमीन के बदले कितना बड़ा प्लॉट दिया जाएगा। इसे परिषद बोर्ड से पास कराया गया था,लेकिन इसी बीच किसान नेताओं के बीच विवाद हो जाने से मामला अधर में लटक गया था।
विवाद शांत होने के बाद करीब चार महीना पहले परिषद ने पहले चरण में 20 किसानों को भूखंड के आवंटन पत्र सौंपे थे। परिषद सचिव का कहना है कि अब इनको भी बड़े भूखंड दिए जाएंगे।
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