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Lucknow News: तकनीक की मदद और बेहतर स्क्रीनिंग से बढ़ी बच्चों में टीबी की पहचान

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प्रतीकात्मक।
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लखनऊ। जनपद में बच्चों में टीबी की समय पर पहचान और उपचार की दिशा में स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विभाग की बढ़ी सक्रियता और सघन स्क्रीनिंग के कारण तीन वर्षों में बच्चों में टीबी के मरीजों को खोजने की दर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023 में जहां टीबी के 1,970 मामले चिह्नित हुए थे। वहीं, वर्ष 2024 में यह संख्या 2,302 और वर्ष 2025 में 2,508 तक पहुंच गई।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके सिंघल ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह के नेतृत्व में बच्चों में टीबी की समय पर पहचान और बेहतर जांच के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस मुहिम में वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।
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आशा और एएनएम भी किए गए प्रशिक्षित
बच्चों में टीबी की स्क्रीनिंग को मजबूत करने के लिए 429 बाल रोग विशेषज्ञों, चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। केजीएमयू की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सारिका गुप्ता ने इन स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया। इसके साथ ही, 1,161 आशा, एएनएम, सीएचओ और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को संभावित टीबी ग्रसित बच्चों की पहचान और उन्हें उच्च केंद्रों पर रेफर करने के लिए तैयार किया गया है।
तकनीक ने बनाई ट्रैकिंग आसान
आधुनिक तकनीक की मदद से अब बच्चों की जांच, ट्रैकिंग और फॉलोअप की प्रक्रिया काफी आसान हो गई है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने क्यूआर कोड आधारित रेफरल प्रणाली लागू की है। साथ ही, बच्चों के सैंपल लेने में होने वाली दिक्कत को दूर करने के लिए अधिकांश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ''गैस्ट्रिक एस्पिरेट'' और ''इंड्यूस्ड स्पुटम सैंपल'' संग्रह की आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
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समय पर पहचान से कम की जा सकती हैं टीबी की जटिलताएं
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने कहा कि बच्चों में टीबी की समय पर पहचान और त्वरित उपचार न केवल संक्रमण की शृंखला तोड़ता है, बल्कि गंभीर शारीरिक जटिलताओं को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य लक्ष्य हर उस बच्चे तक समय पर जांच और निशुल्क इलाज पहुंचाना है, जिसमें टीबी के संभावित लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
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