फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'हवा' में सड़क...भ्रष्टाचार के लिए लंबाई ही नहीं चौड़ाई में भी किया खेल, एक और चौंकाने वाला खुलासा

Sun, 21 Jun 2020 08:43 AM IST
शाहरुख खान अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन
महाराजगंज में 'हवा' में ही 27 करोड़ की सड़क मंजूर करवा लेने के मामले में परत दर परत गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत इस प्रोजेक्ट में रकम हड़पने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में सड़क की लंबाई के बाद सड़क की भूमि की चौड़ाई भी गलत दर्ज की गई है।
विज्ञापन


पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने 16 मीटर चौड़ी राजमार्ग की भूमि को 30 मीटर दिखाकर डीपीआर भी मंजूर करा ली थी। ‘अमर उजाला में महाराजगंज में एनएच-730 के रामनगर से सिसवा बाबू सेक्शन के इस निर्माणाधीन सड़क का खुलासा किया था। 

इसके बाद आनन-फानन में अफसरों ने शनिवार को छुट्टी के बावजूद पीडब्ल्यूडी मुख्यालय का संबंधित दफ्तर खुलवाया और दोषी तत्कालीन एक्सईएन के खिलाफ आरोपपत्र फाइनल करके शासन को भेजा। सूत्रों के मुताबिक सोमवार को आरोपपत्र संबंधित अधिकारी को भेज दिए जाएंगे। 
विज्ञापन


यह है पूरा मामला 
वर्ष 2018 में सिसवा बाबू सेक्शन के 21.12 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण के लिए डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी गई। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए 185.18 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी कर दी। जबकि, सड़क के इस भाग की लंबाई कुल 18.39 किलोमीटर ही है। 

 
विज्ञापन

इस तरह एस्टीमेट में 2.73 किलोमीटर सड़क ज्यादा दिखाकर इस हिस्से की लागत 26.9432 करोड़ रुपये हड़पने के लिए यह पूरा खेल किया गया।  इतना ही नहीं, सड़क की भूमि की चौड़ाई (आरओडब्ल्यू) भी डीपीआर में गलत दिखाई गई। सड़क के चैनेज 501.850 पर स्थित सक्सेना चौराहे पर आरओडब्ल्यू 30 मीटर दिखाया गया, जबकि चौराहे पर राजमार्ग की भूमि मात्र 16 मीटर ही उपलब्ध है। 

इस भूमि पर भी अन्य व्यक्तियों का कब्जा था, जिन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग की नीति के तहत मूल्यांकन करते हुए मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था है, लेकिन राजमार्ग के गैर स्वामित्व वाली भूमि को भी राजमार्ग के आरओडब्ल्यू में दिखाया गया। 

डीपीआर में राजमार्ग के स्वामित्व के बाहर की भूमि के लिए मुआवजा भुगतान के लिए डीपीआर में कोई प्रावधान नहीं किया गया। इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति का संकट भी पैदा हुआ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें