लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस पर हजरतगंज स्थित सीपीएमजी दफ्तर में ध्वजारोहण को लेकर डाक विभाग व बीएसएनएल आमने-सामने आ गए। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद सहमति बनी। इसके मुताबिक पहले डाक विभाग की ओर से ध्वजारोहण व सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इसके बाद ध्वज को उतारा गया और फिर बीएसएनएल की ओर से तिरंगा फहराया गया।
उत्तर प्रदेश डाक परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल (सीपीएमजी) कार्यालय की बिल्डिंग में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) का भी दफ्तर है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर दोनों विभागों में विवाद खड़ा हो गया कि कौन राष्ट्रीय ध्वज फहराएगा। मामला पुलिस तक पहुंचा, तब जाकर सहमति बनी। इसके मुताबिक 15 अगस्त की सुबह सात बजे डाक विभाग के सीपीएमजी ने ध्वजारोहण किया। इसके बाद 45 मिनट तक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए और 7.45 बजे ध्वजारोहण स्थल खाली कर दिया गया। इसके बाद राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक उतारकर उचित स्थान पर लगा दिया गया। सुबह 8 बजे बीएसएनएल के मुख्य महाप्रबंधक ने ध्वजारोहण किया।
फहराने के बाद ध्वज उतारना गलत
इतिहासविद विनीत चतुर्वेदी ने बताया कि दोबारा ध्वजारोहण के लिए तिरंगे को उतारना गलत है। बेहतर होता दोनों विभागों के अधिकारी आपसी तालमेल दिखाते हुए एक साथ ध्वजारोहण कर लेते। यह फ्लैग कोड के भी खिलाफ है।
यह थी परंपरा
अधिकारियों के मुताबिक बिल्डिंग डाक विभाग की है, जिसमें बीएसएनएल का दफ्तर भी है। पहले परंपरा थी कि डाक विभाग व बीएसएनएल एक-एक बार ध्वजारोहण करेंगे। यह परंपरा अब बंद हो गई। हालांकि, बीएसएनएल अधिकारियों की मानें तो परंपरा के मुताबिक इस वर्ष ध्वजारोहण की उनकी बारी थी, जिसमें डाक विभाग ने अड़ंगा लगाया है।
बिल्डिंग पर सीपीएमजी का स्वामित्व है, जिसमें बीएसएनएल किराये पर है। उसे खाली करने के लिए नोटिस भी भेजा गया है। ध्वजारोहण को लेकर विवाद जैसी स्थितियां नहीं थीं।
-कृष्ण कुमार यादव, डाक निदेशक
ध्वजारोहण को लेकर विवाद नहीं था। कुछ मतभेद थे, जिन्हें दूर कर लिया गया। सहमति पत्र के मुताबिक ध्वजारोहण किया गया।
- अतुल कुमार, महाप्रबंधक, बीएसएनएल