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UP News: सस्ती सुविधा के बावजूद KGMU में रोबोटिक सर्जरी की रफ्तार सुस्त, कम शुल्क के बाद भी नहीं आ रहे मरीज

Mon, 16 Mar 2026 02:36 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

सस्ती सुविधा के बावजूद केजीएमयू में रोबोटिक सर्जरी की रफ्तार सुस्त है। अन्य संस्थानों के मुकाबले कम शुल्क के बावजूद मरीज आगे नहीं आ रहे हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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रोबोटिक सर्जरी - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ स्थित केजीएमयू में दो रोबोट आने के बावजूद रोबोटिक सर्जरी को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। यहां रोबोट से होने वाली सर्जरी की संख्या अभी भी बेहद कम है। यह हालत तब है, जब अन्य संस्थानों के मुकाबले केजीएमयू में रोबोटिक सर्जरी की फीस बेहद कम है।

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केजीएमयू में पिछले महीने आधुनिकतम दा विंची रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत हुई है। एसएसआई मंत्रा रोबोटिक सर्जरी की सुविधा करीब एक वर्ष से मिल रही है। अन्य संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा एक लाख रुपये के करीब से शुरू होती है। केजीएमयू में 53 हजार रुपये से ही इसकी शुरुआत है।

पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी में अधिक सटीकता के साथ जटिल प्रक्रिया संभव हो पाती है। इसमें चीरा भी छोटा लगता है और खून भी कम बहता है। इससे मरीजों को कम दर्द होने के साथ ही तेजी से रिकवरी होती है, जिससे अस्पताल में कम समय रहना पड़ता है। बावजूद इसके अभी तक केजीएमयू में रोबोटिक सर्जरी का आंकड़ा सौ के पार नहीं पहुंचा है।

रोबोटिक सर्जरी के लाभ

ज्यादा सटीकता, बेहतर दृश्यता, छोटे चीरों के कारण कम रक्तस्राव, तेज रिकवरी।

केजीएमयू में रोबोटिक सर्जरी की फीस

उपयोग किए जाने वाले पोर्ट कंपनी को दिया जाने वाला शुल्क संचालन की फीस कुल
दो पोर्ट 53,100 5,000 58,100
तीन पोर्ट 69,620 10,000 79,620
चार पोर्ट 93,810 15,000 1,08,810
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केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि केजीएमयू में आने वाले काफी मरीजों की आर्थिक क्षमता बेहद कम होती है। अन्य संस्थानों के मुकाबले यहां रोबोटिक सर्जरी की फीस कम है, लेकिन परंपरागत सर्जरी से यह महंगी पड़ती है। हालांकि, इसके फायदों को देखते हुए रोबोटिक सर्जरी की ओर रुझान बढ़ रहा है।

लोहिया में 11 महीने में 300 रोबोटिक सर्जरी

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में रोबोटिक सर्जरी कार्यक्रम की शुरुआत के 11 महीनों में ही 300 से अधिक रोबोटिक सर्जरी की गई हैं। इसमें यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग का योगदान सबसे ज्यादा है। यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट विभाग में 253, गैस्ट्रो सर्जरी में 28, ऑन्को सर्जरी में 24 ऑपरेशन रोबोट से किए गए।
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