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लाशों की खरीद-फरोख्त का धंधा, लाखों में बिकती है एक लावारिस लाश

Sat, 09 Sep 2017 09:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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जीसीआरजी मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेजों में एनॉटमी की पढ़ाई के लिए डेड बॉडी उपलब्ध कराने के लिए लावारिस लाशों की खरीद-फरोख्त का धंधा चल रहा है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के कड़े रुख के चलते इस धंधे को बढ़ावा मिला है।
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तीन साल पहले फैजाबाद रोड पर एक रसूखदार व्यक्ति की दुर्घटना के बाद उसे लावारिस मानकर शव को निजी मेडिकल कॉलेज को बेच दिया गया था।

जब उसकी पहचान दक्षिण भारत के एक बड़े अधिकारी का शव होने की जानकारी मिली तो इस शव को वापस मंगाकर मॉर्च्युरी में रखवाया गया था।

राजधानी में लावारिस लाश को मेडिकल कॉलेज को बेचने का ये पहला मामला सामने आया था। इसके बाद जब मामले की पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि प्रदेश भर में मेडिकल कॉलेज इस धंधे से जुड़े हैं।

रोड एक्सीडेंट में शिकार लावारिस शवों को पुलिस के साथ मिलकर मेडिकल कॉलेजों को सौंप दिया जाता है।

बताया जा रहा है कि काफी समय तक केजीएमयू मॉर्च्युरी में हरदोई रोड पर स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज की सफेद रंग की हाफ डाला दे रात लावारिस शव लादकर ले जाता था।
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जब मामला खुला तो धंधा रुक गया। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार मेडिकल काउंसिल और डेंटल काउंसिल की गाइड लाइन के अनुसार बिना डेड बॉडी पर डिसेक्शन किए एमबीबीएस और बीडीएस की डिग्री ही नहीं दी जा सकती।

बिना पोस्टमार्टम के शवों की डिमांड

सूत्रों के अनुसार, ऐसे शवों की डिमांड ज्यादा होती है जिनका पोस्टमार्टम न हुआ और ज्यादा क्षत-विक्षत न हो। इसलिए ऐसे लावारिस शव जिनकी मौत अज्ञात हो उनकी डिमांड ज्यादा है। कई बार पोस्टमार्टम वाले लावारिस शव इसलिए मेडिकल कॉलेज लेते हैं कि  हड्डियों को पढ़ाई के लिए रखा जा सके।

 
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केजीएमयू कराता है विधिवत देहदान

केजीएमयू का एनॉटमी विभाग अपने छात्रों की पढ़ाई के लिए विधिवत देहदान कराता है। 2006 में वहां देहदान की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन बीते 6-7 सालों में इसमें तेजी आई।

लोगों में जागरूकता बढ़ने के बाद स्वयं देहदान के लिए आने की होड़ लगी है। केजीएमयू एनॉटमी विभाग के 11 सालों के दौरान 227 देहदान हो चुके हैं। 2017 में अब तक 20 से अधिक देहदान हुए है। इसे बढ़ावा देने के लिए केजीएमयू देहदान करने वालों के परिवार को नि:शुल्क इलाज की सुविधा देता है। उनका समय-समय पर सम्मान करता है। यही नहीं वह इसके लिए पंजीकरण भी कराता है। 
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