सरकारी मशीनरी की कारस्तानी भी अजीबोगरीब है। एक ग्राम पंचायत अधिकारी को 31 दिसंबर को रिटायर होना था, लेकिन विभाग उन्हें रिटायर करना ही भूल गया। अफसर ने भी इसका फायदा उठाते हुए महीनेभर में लगभग दस लाख रुपये के चेक जारी कर डाले। विभाग की जब नींद खुली तो 31 जनवरी को अफसर को रिटायर किया गया।
इस बीच एक माह के दौरान जारी चेकों की वैधानिकता पर सवाल उठने लगा है। विकास खंड गिलौला में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी राना प्रताप सिंह का कार्यकाल गत 31 दिसंबर को ही समाप्त हो गया, लेकिन जिला पंचायत राज कार्यालय से उनको कोई नोटिस नहीं दिया गया।
राना प्रताप ने भी मौके का फायदा उठाया और सातों गांवों में विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग दस लाख रुपये के चेक जारी कर डाले। यह सिलसिला 31 दिसंबर से 31 जनवरी तक चलता रहा। गलती का अहसास होने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी ने 31 जनवरी को राना प्रताप को सेवानिवृत्ति किया है।