डेंगू का डंक स्वास्थ्य विभाग पर भारी पड़ रहा है। सीएमओ ऑफिस के आंकड़ों के अनुसार जहां अभी तक डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या 176 और बीमारी से मरने वालों की संख्या दस तक पहुंच चुकी है।
वहीं सच्चाई इससे कहीं अधिक डरावनी है। सरकारी अस्पतालों की अपेक्षा निजी अस्पतालों में डेंगू मरीजों की भारी भीड़ है।
सरकारी अस्पतालों के अनुमानित आंकड़ों को इसमें जोड़ लिया जाए तो अब तक मरीजों की संख्या आठ सौ से ज्यादा हो चुकी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुल 174 मरीजों में डॉ. सिविल अस्पताल के 22, बलरामपुर के 42 और लोहिया अस्पताल के 30 मरीज हैं। इन अस्पतालों में लगभग तीन हजार मरीज बुखार और डेंगू के लक्षणों की शिकायत के बाद पहुंचे थे।
इनमें से अभी तक 94 मामले डेंगू के पाए गए हैं। लोहिया में दो हजार मरीजों की जांच करायी गई। इसमें 30 में डेंगू पॉजिटिव मिला। अन्य मरीज केजीएमयू व अन्य निजी अस्पतालों के हैं।
वर्ष 2010 के बाद ये दूसरा मौका है जब हाईकोर्ट में डेंगू को लेकर जनहित याचिका दायर की गई और सुबे के अधिकारियों को कोर्ट के गुस्से का शिकार होना पड़ा है।
2010 में जो गलती सीएमओ डॉ. एके. शुक्ला ने की थी वही वर्तमान सीएमओ डॉ. एस.एन.एस. यादव ने दोहरा दी। बढ़ते मरीजों को उनके अधिकारी गलत पैथोलॉजी जांच रिपोर्ट का नतीजा कहकर अनदेखा करते रहे।
नतीजा ये हुआ कि अचानक मरीजों की संख्या अगस्त माह के अंत तक 69 तक पहुंच गई। ये वो अधिकृत आंकड़े थे जिन्हें स्वयं सीएमओ ऑफिस ने स्वीकार किया था। 13 सितंबर तक मरीजों का आंकड़ा 121 तक पहुंच गया।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के साथ जिला प्रशासन, जिला मलेरिया अधिकारी और अरबन मलेरिया यूनिट में हड़कंप मच गया। रोस्टर बनाकर नगर निगम ने फॉगिंग शुरू करायी और अरबन मलेरिया यूनिट ने एंटी लार्वा कार्रर्वाई प्रारंभ की।