पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत विद्युत कार्य मंडल मिर्जापुर के अधीक्षण अभियंता राजेश ने पूर्वांचल विद्युत निगम में निदेशक (वित्त) का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (वित्त) सुधीर आर्य को 14 जनवरी 2020 को कुछ फाइलों की मंजूरी के लिए रिश्वत की पेशकश की थी। इसके बाद राजेश ने 22 जनवरी 2020 को पुन: कुछ ऐसी फाइलों को मंजूरी देने के लिए आर्य को उनके दफ्तर में दो अधीक्षण अभियंताओं की मौजूदगी में रिश्वत की पेशकश की, जिन फाइलों पर कार्रवाई करने से वह इनकार कर चुके थे।
आर्य ने इसकी लिखित शिकायत कॉर्पोरेशन प्रबंधन से की थी। इस पर 6 फरवरी 2020 को राजेश को निलंबित करते हुए उन्हें एमडी पूर्वांचल वितरण निगम, वाराणसी के कार्यालय से संबद्ध करते हुए जांच बैठा दी थी। कॉर्पोरेशन के सीएमडी की ओर से बीते बृहस्पतिवार को जारी आदेश में कहा गया है कि राजेश पर लगाए गए दोनों आरोप सिद्ध पाए जाते हैं, ये अत्यंत गंभीर हैं व कदाचरण की श्रेणी में आते हैं। निलंबन समाप्ति के बाद राजेश गुप्ता को सेवा में बहाल करके अधिशासी अभियंता के पद पर पूर्वांचल वितरण निगम वाराणसी के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।