रायबरेली। शहर स्थित रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल किया गया है। इसके लिए काम भी तेजी से कराया जा रहा है। स्टेशन के बाहरी हिस्से यानी सर्कुलेटिंग एरिया को विकसित करने के लिए शनिवार को ध्वस्तीकरण शुरू हो गया। ध्वस्तीकरण कार्य पूरा होने के बाद रेलवे अस्पताल के पास से तीसरा प्रवेश द्वार बनेगा जो मुख्य सड़क से सीधा प्लेटफॉर्म तक जाएगा। खाली कराए जाने वाले परिसर में सुंदरीकरण कार्य एवं नई पार्किंग भी प्रस्तावित है।
रेलवे स्टेशन पर मुख्य सड़क से प्रवेश के लिए दो रास्ते हैं। प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए भी दो गेट बनाए हैं जिनमें एक पूछताछ कार्यालय तो दूसरा यात्री प्रतीक्षालय से है। तीसरा प्रवेश द्वार मुख्य सड़क से सर्कुलेटिंग एरिया होते हुए प्लेटफार्म तक जाएगा जो रेलवे अस्पताल के पास बनेगा।
स्टेशन के मुख्य भवन और अस्पताल के बीच बने आठ क्वार्टर, वाहन स्टैंड, जर्जर मनोरंजन क्लब, उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन का कार्यालय व शौचालय ध्वस्त किया जाना है। इसके लिए पहले 15 मार्च और फिर 31 मार्च तक का समय तय हुआ लेकिन शिफ्टिंग न होने के कारण काम लटका रहा।
शौचालय खाली होने और कई क्वार्टरों में रहने वाले कर्मचारियों की शिफ्टिंग के बाद शनिवार को ध्वस्तीकरण का कार्य शुरू हुआ। सबसे पहले बुल्डोजर से शौचालय को ढहाया गया। इसके बाद अस्पताल के पास बने दो क्वार्टर ढहाए गए।
वरिष्ठ खंड अभियंता (कार्य) अरुण कुमार ने बताया कि ध्वस्तीकरण का कार्य शुरू हो गया है। जल्दी ही सब कुछ ढहा दिया जाएगा ताकि मलबा भी जल्दी हटवाकर सर्कुलेटिंग एरिया विकसित करने का काम शुरू कराया जा सके। यूनियन कार्यालय और दो क्वार्टरों में रहने वाले लोग शिफ्ट नहीं हुए हैं, इन्हें भी जल्दी शिफ्ट करा दिया जाएगा।
यूनियन दफ्तर को अभी नहीं मिलेगी स्थायी जगह
ध्वस्तीकरण की जद में उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन (यूआरएमयू) का कार्यालय भी आ रहा है जिसे शिफ्ट किए जाने को लेकर ऊहापोह कम नहीं हुआ है। विभागीय स्तर पर इस कार्यालय को मल्टी-फंक्शनल कांप्लेक्स (एमएफसी) में शिफ्ट करने की तैयारी है लेकिन यह व्यवस्था अस्थायी रहेगी। दूसरी तरफ यूनियन के पदाधिकारी कार्यालय के लिए स्थायी जगह मांग रहे हैं। सहायक मंडल मंत्री लवकुश सोनकर का कहना है कि अस्थायी तौर पर जिस तरह कार्यालय शिफ्ट किए जाने की बात कही गई है, वहां व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं हैं। स्थायी जगह कब और कहां मिलेगी, इस बारे में अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है।
जेसीबी गरजी तो फटाफट खाली होने लगे क्वार्टर
जिन आठ क्वार्टर को ढहाया जाना है, उनमें से पांच क्वार्टर में जीआरपी के लोग रहते हैं। यही क्वार्टर खाली होने में विलंब हुआ। हालांकि इन सभी को दूसरी जगह मिल गई है लेकिन शिफ्ट करने में देरी हो रही है। शनिवार को जैसे ही जेसीबी गरजनी शुरू हुई, क्वार्टर में रह रहे लोगों में हड़कंप मच गया। तुरंत शिफ्टिंग शुरू हो गई। आननफानन सामान के साथ लोग जाने लगे। अब सिर्फ दो क्वार्टर खाली होने रह गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरी जगह खाली कराकर दो-तीन दिन में सब कुछ ध्वस्त करा दिया जाएगा।