दिल्ली पुलिस के पुलिस स्टेशनों व यूनिटों में सब-इंस्पेक्टर (एसआई) से पदोन्नति पाकर इंस्पेक्टर बने करीब 350 इंस्पेक्टर (निरीक्षक) के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जब इनको किसी कार्यक्रम की सुरक्षा में लगाया जाता तो उनकी गिनती इंस्पेक्टर में होती है। जब वह थाने में ड्यूटी करते हैं उनकी गिनती एसआई में होती है।
यानी इंस्पेक्टर से एसआई की ड्यूटी करवाई जा रही है। ऐसे में काफी इंस्पेक्टर ड्यूटी करने से मना कर देते हैं। दक्षिण-पूर्व जिला डीसीपी ईशा पांडेय को तो इस बाबत ऑर्डर भी निकलना पड़ा था।
दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने अपने कार्यकाल में काफी पुलिसकर्मियों को तरक्की दी थी। इन्होंने 2008 बैच के सभी एसआई को मई-जून, 22 में पदोन्नति देकर इंस्पेक्टर बना दिया था। इसके बाद 2009 के बैच के करीब 200 एसआई को तीन जुलाई, 22 को इंस्पेक्टर बना दिया था। पूर्व पुलिस आयुक्त इन इंस्पेक्टर की तैनाती कर पाते उससे पहले ही उन्हें हटा दिया गया।
इसके बाद संजय अरोड़ा को पुलिस आयुक्त बना दिया गया। मगर इन एसआई की अभी तक तैनाती नहीं की गई है। ये इंस्पेक्टर जहां तैनात थे वहीं तैनात हैंं। ऐसे में पुलिस स्टेशनों में चार से छह इंस्पेक्टर हो गए हैं। पुलिस स्टेशन में थानाध्यक्ष के साथ तीन इंस्पेक्टर ही होते हैं।
पदोन्नति पाए एक इंस्पेक्टर ने बताया कि जब उनकी ड्यूटी अरेंजमेंट में लगती है तो गिनती इंस्पेक्टर में होती है और थाने में एसआई की ड्यूटी करवाई जाती है। उनकी एमरेंजसी ड्यूटी लगाई जाती है और कॉल पर भेजा जाता है। हालांकि ज्यादातर पुलिस स्टेशनों में ये हो रहा है कि इंस्पेक्टर एसआई की ड्यूटी करने से मना कर देते हैं।
ऐसे में दक्षिण-पूर्व जिला डीसीपी ईशा पांडेय ने ऑर्डर निकाल पड़ा। उन्होंने अपने ऑर्डर में कहा है कि कोई भी इंस्पेक्टर एसआई वाली ड्यूटी के लिए मना नहीं करेगा। तैनाती नहीं होने और एसआई की ड्यूटी कराने से नए इंस्पेक्टरों में भारी रोष है। नए इंस्पेक्टर के काम से मना करने पर थानाध्यक्षों के सामने भी अजीब स्थिति पैदा हो जाता है। इससे थानों में झगड़े हो रहे हैं। कई इंस्पेक्टर का कहना है कि वह इंतजार कर रहे हैं कि पुलिस मुख्यालय जल्दी उनकी तैनाती कर दे।