आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए एकत्र किए गए विस्फोटक के साथ फरीदाबाद से पकड़ी गई डॉ. शाहीन डेढ़ वर्ष से परिवार के संपर्क में नहीं थी। पूछताछ में शाहीन के पिता सईद अंसारी ने यह दावा किया है। उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं, जिसमें बड़ा बेटा शोएब है। डॉ. शाहीन दूसरे, जबकि डॉ. परवेज तीसरे नंबर पर हैं। लोकसेवा आयोग से चयनित होकर शाहीन कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर काम कर चुकी है।
पिता सईद ने बताया कि वह हर हफ्ते परवेज से फोन पर बात करते हैं। आखिरी बार उनकी परवेज से फोन पर चार नवंबर को बात हुई थी। वह आईआईएम रोड स्थित मुतक्कीपुर के तकवा कॉलोनी में मकान बनवाकर रहता है। एक सप्ताह से उनकी बेटे से बात नहीं हुई। पिता सईद खंदारी बाजार में करीब 200 स्क्वाॅयर फीट के तीन मंजिला मकान में रहते हैं। वह वन विभाग से सेवानिवृत्त हैं। एटीएस ने सईद के घर से मोबाइल फोन और हार्ड डिस्क को कब्जे में लिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार डॉ. मुजम्मिल के पास मिले कार में एके 47 बरामद किया गया था। पूछताछ में मुजम्मिल ने डॉ. शाहीन का नाम लिया था। इसके बाद शाहीन गिरफ्तार की गई। छानबीन में सामने आया कि शाहीन अपने भाई डॉ. परवेज के संपर्क में थी। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब आठ बजे एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस परवेज के आईआईएम रोड स्थित मकान पर पहुंची। घर पर ताला लगा था, जिसे तोड़कर टीम भीतर दाखिल हुई। एटीएस को परवेज के घर से एक लैपटाॅप मिला है।
परवेज के घर के बाहर एक कार खड़ी मिली। कार पर इंटीग्रल यूनिवर्सिटी का पास लगा था। छानबीन में पता चला कि परवेज वहां पर काम करता था। कार परवेज के भाई शोएब के नाम है, जो सहारनपुर में रजिस्टर्ड है। फरीदाबाद से बरामद कार परवेज के नाम रजिस्टर्ड है।
करीब चार घंटे तक खुफिया एजेंसियों ने परवेज का घर खंगाला। एटीएस ने आस पड़ोस के लोगों से भी परवेज के बारे में जानकारी जुटाई है। माना जा रहा है कि परवेज को उसके साथियों के पकड़े जाने की भनक लग गई थी, जिसके बाद वह घर से भाग निकला था।
इंटीग्रल विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद हासिर सिद्दीकी के मुताबिक डॉ. परवेज अंसारी ने एक सप्ताह पहले ही संस्थान से इस्तीफा दे दिया था। डॉ. परवेज सईद अंसारी मेडिसिन विभाग में सीनियर रेजिडेंट के रूप में काम कर रहे थे। उनका इस्तीफा तत्काल मंजूर भी हो गया था।
उन्होंने इस्तीफे का कारण व्यक्तिगत बताया था। इंटीग्रल विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉ. परवेज के कामकाज को संतोषजनक बताया है। इस तरह की घटना में लिप्त होने पर हैरत भी जताई। रजिस्ट्रार के मुताबिक, कामकाज में कभी भी शिकायत नहीं आई थी, हालांकि इंटीग्रल प्रशासन ने डॉ. परवेज के इस्तीफे की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई।