Delhi Assembly Elections: दिल्ली विधानसभा चुनाव में आज से प्रचार खत्म हो गया। बसपा ने इन चुनावों को मजबूती से लड़ने की बात कही थी। बावजूद इसके मायावती ने इन चुनावों से दूरी बनाई।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुख्य स्टार प्रचारक होने के बावजूद बसपा अध्यक्ष मायावती ने कोई भी रैली अथवा जनसभा को संबोधित नहीं किया। दिल्ली में दलित वोट बैंक के अपने मजबूत आधार के बावजूद उन्होंने प्रचार की पूरी कमान अपने भतीजे एवं पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद के कंधों पर डाल दी। मायावती के इस फैसले के अब सियासी निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं।
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बता दें कि बसपा सुप्रीमो अपने जन्मदिन के बाद दिल्ली चली गई थीं, हालांकि उन्होंने किसी भी जनसभा में हिस्सा नहीं लिया। दिल्ली में बसपा की सभी बड़ी जनसभाओं का नेतृत्व आकाश आनंद ने ही किया। जानकारों की मानें तो मायावती ने पार्टी में आकाश आनंद का कद बढ़ाने और उन्हें उत्तराधिकार को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। इससे पहले हरियाणा चुनाव में भी आकाश आनंद को ही नेतृत्व सौंपा गया था, जिन्होंने गठबंधन से लेकर तमाम अहम फैसले लिए थे। हरियाणा के बाद दिल्ली की राजनीति में भी आकाश के पैर जमाने पर पूरा फोकस रखा गया है।
दिल्ली से है खास लगाव
बसपा सुप्रीमो का दिल्ली से खास लगाव है। उनका जन्म दिल्ली में हुआ था, जिसके बाद उन्होंने वहीं उच्च शिक्षा तक ग्रहण की। उनका सियासी सफर भी दिल्ली से शुरू हुआ था। वह अधिकतर दिल्ली और लखनऊ में ही रहती हैं। दिल्ली में बसपा का खासा वोट बैंक भी रहा है, जिस पर बीते कुछ वर्षों में आम आदमी पार्टी अपना दखल बढ़ाती रही है।