पिछले साल कुछ आईएफएस अफसर अतिरिक्त प्रमुख मुख्य वन संरक्षक यानी
एपीसीसीएफ के पद से सेवानिवृत्त हुए।
इन अफसरों को इस बात का मलाल था कि
सेवानिवृत्ति के वक्त जो पद उन्हें मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। इनकेबैच
केजो अफसर अन्य प्रदेशों में तैनात थे, वह प्रमुख मुख्य वन संरक्षक
(पीसीसीएफ) के पद से रिटायर हुए।
यानी एक पद ऊपर। प्रदेश सरकार ने तय समय
में डीपीसी नहीं कराई जिससेपदोन्नति केसाथ ही पेंशन में भी उन्हें नुकसान
उठाना पड़ा। प्रदेश में समय से अफसरों की पदोन्नति नहीं हो पा रही है।
शासन में तैनात बस दो अफसर
इससे
वे अपने बैच के अफसरों से प्रमोशन के मामले में पीछे चल रहे हैं। अन्य
प्रदेशों में आईएफएस अपने विभाग के अलावा अन्य विभागों में प्रमुख सचिव,
सचिव और निदेशक के पद पर नियुक्त हो जाते हैं, लेकिन प्रदेश में महज दो
आईएफएस अफसर शासन में तैनात हैं।
प्रदेश के
1987 बैच के आईएफएस अफसरों की बात करें तो वे मुख्य वन संरक्षक के पद पर
काम कर रहे हैं। जबकि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इसी बैच के अफसर
एपीसीसीएफ के पद पर प्रमोट हो चुके हैं।
इसका सबसे बड़ा कारण इन राज्यों
में आईएफएस के लिए अन्य विभागों और शासन में नियुक्ति केदरवाजे खुले हैं।
लिहाजा अफसर अपने मूल विभाग से इन विभागों में चले जाते हैं।
वहीं,
प्रदेश में हालात ये हैं कि इस काडर के सचिवालय में महज दो अफसर ही अपनी
सेवाएं दे रहे हैं। ये अफसर वन विभाग में सचिव और विशेष सचिव के पद पर हैं।
जबकि अन्य विभागों में इनके लिए नो इंट्री है।
छत्तीसगढ़ की बात करें तो
वहां मुख्यमंत्री के सचिव आईएफएस काडर से हैं, तो झारखंड और बिहार में कई
अफसर विभागाध्यक्ष के पद पर हैं।
दिल्ली
सरकार में पिछले दिनों सचिव स्वास्थ्य के पद पर आईएफएस अफसर तैनात थे। कई
साल पहले सचिवालय में आईएफएस अफसरों केलिए पद आवंटित किए गए थे।
उस वक्त
पीएफएस से आईएफएस बने अफसरों को संयुक्त सचिव स्तर पर नियुक्त
किया गया था, जिसका उन्होंने विरोध किया। इसकेबाद आईएफएस के लिए अन्य
विभागों में नियुक्ति के मौके खत्म हो गए।
एसोसिएशन भी कम जिम्मेदार नहींप्रदेश
सरकार अक्सर अफसरों की कमी का रोना रोती है। अगर अफसरों को नियुक्त कर
दिया जाए तो प्रमोशन की दिक्कतें पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी और अफसरों की
ज्यादा दिलचस्पी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की नहीं होगी।
प्रदेश में
217 अफसरों का काडर है। फिलहाल 1994 बैच के अफसर वन संरक्षक और 1987 बैच
के अफसर मुख्य वन संरक्षक के पद पर तैनात हैं, जबकि 1981 बैच के आईएफएस
पीसीसीएफ के पद पर प्रमोट हो चुके हैं।
हालांकि अफसरों की पदोन्नति और अन्य
विभागों में नियुक्ति न होने के लिए आईएफएस एसोसिएशन भी कम जिम्मेदार नहीं
है। अन्य प्रदेशों में एसोसिएशन अपनी बात को सरकार के सामने उठाती है।
लिहाजा अफसरों को पूरे मौके मिलते हैं।