लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को भी आने वाले सत्र से पीएचडी कराने का मौका मिलेगा। इसके लिए विवि ने पीएचडी ऑर्डिनेंस-2015 में आंशिक संशोधन किया है जिसे दो जुलाई को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में रखा जाएगा।
इस संशोधन के बाद जिन डिग्री कॉलेजों में पीजी का कोर्स चलता है वहां के शिक्षक पीएचडी करा सकेंगे। इतना ही नहीं यह शिक्षक स्वतंत्र रूप से पीएचडी कराएंगे न कि जॉइंट सुपरवाइजर के रूप में। कॉलेज शिक्षकों को पीएचडी कराने की इजाजत देने के लिए कई सालों से कवायद चल रही थी।
एलयू ने 2015 में तैयार किए गए नए पीएचडी ऑर्डिनेंस में कॉलेज शिक्षकों को पीएचडी कराने की अनुमति तो दी थी लेकिन इसमें वह जॉइंट सुपरवाइजर के तौर पर शोध कराते। इसे लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) का शुरू से ही विरोध चल रहा था।
संगठन के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय व अन्य पदाधिकारी लगातार यह मांग कर रहे थे कि उन्हें जॉइंट सुपरवाइजर न बनाया जाए। बल्कि उन्हें विवि शिक्षकों की तरह ही स्वतंत्र रूप से शोध कराने दिया जाए। इसे देखते हुए विवि ने ऑर्डिनेंस में बदलाव किया है।